⚡ Current Electricity One Shot 🔥 | Class 12 Physics Chapter 3 | Board Exam 2025–2026 | Munil sir

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Brief Summary

This video covers comprehensive lessons on Current Electricity, focusing on definitions, formulas, laws, and concepts integral to understanding electric current, voltage, resistance, and their interactions.

  • The chapter dispels the misconception of difficulty by emphasizing the simplicity of concepts.
  • Key terms like electric current, potential difference, Ohm's Law, and associated formulas are clearly defined and explained.
  • Relationships between different elements such as resistance, conductivity, drift velocity, and temperature dependence are explored.

Introduction to Current Electricity

The session begins with a discussion on Current Electricity, clarifying that it is a fundamental topic often perceived as difficult but can be easily understood once the core concepts are grasped. It discusses the flow of electrons in a wire and introduces the definitions of electric charge in motion.

Definitions: Electric Current and Charge

The video explains the definition of electric current as the flow of electric charge per unit time, represented mathematically. The symbols for charge and current (q and I, respectively) are introduced, along with the unit of current, Ampere. The concept of instantaneous and average current is clarified, emphasizing the use of differentiation in calculations for instantaneous current.

Ohm's Law and Resistance

Ohm's Law is elaborated, stating that the potential difference across a conductor is directly proportional to the current flowing through it. This section explains how resistive elements affect current flow and depicts Ohm's Law in terms of equations and practical implications, including conditions for its validity based on temperature.

Resistivity and Conductivity

Resistivity, described as a property inherent to materials, varies among different substances and defines how they resist electric current. Relations connecting resistivity to resistance and dimensions of materials are established, among them the formula for calculating resistivity using resistance, length, and cross-sectional area.

Current Density and Mobility

Current density is defined as the amount of electric current flowing through a unit area, with an emphasis on using correct notations for representing current density. Mobility, an essential concept, is discussed, defining it as the velocity of the charge carriers within an electric field.

Kirchhoff's Laws

The video transitions into Kirchhoff's Laws, focusing on the study of currents and voltages in circuits. Kirchhoff's first law emphasizes the conservation of charge, while the second law elaborates on the conservation of energy within a closed circuit. The necessity of analyzing circuits through these laws is highlighted with examples.

Heat and Power in Electrical Circuits

This chapter covers the relationship between electrical energy and heat produced in resistors, introducing Joule's Law, which states that the heat produced is proportional to the square of the current, resistance, and time. The video also discusses the concept of power in electrical systems, presenting formulas for calculating power based on heat generated.

Alloys and Their Electrical Properties

The discussion briefly touches on alloys, clarifying that they are mixtures of metals and how their properties, especially resistivity, differ from pure metals. The heat-resistance relationships in alloys, particularly concerning temperature variations and applications in practical electronics, are explored.

Mixed Grouping of Cells

This part explains the setup and calculations for circuit configurations using multiple cells in series and parallel. It outlines how to determine the overall current and resistance when cells are combined in various configurations, emphasizing practical applications in real-world scenarios.

Applications of Wheatstone Bridge

The Wheatstone Bridge is introduced, illustrating its role in measuring electrical resistance using ratio methods. Conditions for the balance of the bridge are clarified and proven, linking back to Kirchhoff's laws and their application in circuit analysis.

Heating Effect and Its Applications

The final segment emphasizes the heating effect due to electrical current, relevant in daily applications like heating elements, light bulbs, etc. It discusses the balance between beneficial and harmful effects of heat generated in electrical circuits, encouraging viewers to consider practical uses and safety measures.

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Transcript

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0:00 सो करंट इलेक्ट्रिसिटी भाई साहब क्लास 12th का कह सकते हैं कि लोग कहते हैं एक डिफिकल्ट चैप्टर है। लेकिन मेरे हिसाब से इससे आसान चैप्टर नहीं है। अगर आप एक बार ईमानदारी से समझ लो। एक बार सारे कांसेप्ट को समझने के बाद हर एक न्यूमेरिकल तुम्हारी जेब में आके खुद ही बैठ जाएगा। बस समझना जरूरी है। तो देखते हैं कि भाई इस चैप्टर में क्या है ऐसा? तो फटाफट अगर हम चैप्टर की बात करें चैप्टर का नाम है करंट इलेक्ट्रिसिटी। अब चैप्टर का नाम ही जब करंट इलेक्ट्रिसिटी है तो आपको लगता नहीं है कि सबसे पहले हमें ये डिफाइन करना पड़ेगा कि करंट इलेक्ट्रिसिटी किसे कहते हैं? इसका बड़ा सिंपल सा है कि अगर हमारे पास मान लीजिए कहीं पर एक वायर है वायर यह कोई वायर है तो इस वायर के अंदर से इलेक्ट्रॉन फ्लो हो रहे हैं इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन और जिसको नहीं पता है बता दूं इलेक्ट्रॉन के ऊपर चार्ज होता है चार्ज तो कई बार दो बातें हम बोल सकते हैं हम इसको बोल सकते हैं फ्लो ऑफ इलेक्ट्रॉन कि भैया इलेक्ट्रॉन फ्लो हो रहा है या फिर हम बोल

0:46 सकते हैं फ्लो ऑफ चार्ज चार्ज फ्लो फ्लो हो रहा है यानी आप इलेक्ट्रॉन का फ्लो भी बोल सकते हो चार्ज का फ्लो भी बोल सकते हो तो इलेक्ट्रॉन के लिए सिंबल e होता है बेटा और चार्ज के लिए सिंबल होता है q q तो करंट इलेक्ट्रिसिटी किसे कहेंगे? समझने का प्रयास कीजिए। तो अगर आप डेफिनेशन को देखेंगे तो लिखा हुआ है द स्टडी ऑफ इलेक्ट्रिक चार्ज इन मोशन। द स्टडी ऑफ इलेक्ट्रिक चार्ज इन मोशन। जब इलेक्ट्रिक चार्ज मोशन में होता है। इलेक्ट्रिक चार्ज मोशन में होने का मतलब क्या है? कि जब आपका इलेक्ट्रॉन मोशन में होगा तो आप उसको करंट इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं। कितना आसान है। कितना आसान है। तो व्हाट इज़ करंट इलेक्ट्रिसिटी? जब हमारा इलेक्ट्रॉन मोशन में होगा या हमारा इलेक्ट्रिक चार्ज मोशन में होगा तो हम बोलेंगे भैया हम करंट इलेक्ट्रिसिटी की बातें कर रहे हैं। फटाफट इसको एक बार नोट करो, एनालाइज करो। को समझ में आया कि नहीं आया? कमेंट करो। फिर हम आगे बढ़ते हैं। सो नेक्स्ट टॉपिक कि भैया ये अब इलेक्ट्रिक करंट किसे कहेंगे? फिर

1:32 अब इलेक्ट्रिक करंट किसे कहेंगे? तो वही वाली बात है। देखिए कि अगर कोई वायर है हमारे पास सपोज़ करो ये वायर है। तो इस वायर से कितना चार्ज फ्लो हो रहा है? चार्ज मतलब q कितना चार्ज फ्लो हो रहा है? फ्लो ऑफ़ चार्ज पर यूनिट टाइम। और यहां पर एक और चीज ध्यान रखना। इसको बोलते हैं क्रॉस सेक्शनल एरिया। क्रॉस सेक्शनल एरिया। इसको बोलते हैं क्रॉस सेक्शनल एरिया। तो क्रॉस सेक्शनल एरिया से कितना चार्ज फ्लो हो रहा है पर यूनिट टाइम उसी को करंट कहा गया है। तो डेफिनेशन देख लो भैया। फ्लो ऑफ चार्ज पर यूनिट टाइम। फ्लो ऑफ चार्ज फ्लो ऑफ़ चार्ज पर यूनिट टाइम थ्रू अ क्रॉस सेक्शनल एरिया। उसी को हम कहेंगे इलेक्ट्रिक करंट। अब देखो भाई सिंबल ऑफ करंट हम 10थ क्लास में देखते आए हैं कि करंट का सिंबल I होता है। ओ हो हो हो। और ऐसा यूनिट ऑफ़ करंट की अगर हम बात करें तो वो एंपियर होता है। जैसे हमने

2:17 लिखा भैया करंट = 10 एंपियर। तो बहुत छोटी सी बात है। अब यहां पर कुछ एक्स्ट्रा पॉइंट मैं आपको पहले समझा दूं ताकि आपको दिक्कत ना हो। क्या एक्स्ट्रा पॉइंट हमें समझना है। एक बार देख लो कि हमें क्या-क्या एक्स्ट्रा पॉइंट समझना है। एक बार देख लो प्यारे बच्चों। पहला एक्स्ट्रा पॉइंट ये समझना है कि देखो यार करंट का फार्मूला जो ये चार्ज अपॉन में टाइम है। इसको अलग-अलग हिसाब से हम लिख सकते हैं। पहला हिसाब ये होगा कि कई बार करंट को लिखा जाता है dq / dt। ये dq / dt रिप्रेजेंट करता है इंस्टेंटेनियस। इंस्टेंटेनियस करंट। इंस्टेंटेनियस करंट। तो जब भी कभी एग्जाम में आपसे इंस्टेंटेनियस करंट पूछेगा तो आपको डिफरेंशिएशन करना पड़ेगा प्यारे बच्चों क्योंकि ये डिफरेंशिएशन है। तो मैं यहां पर मैं आपको कांसेप्ट सिखा रहा हूं। जब मैं आपको क्वेश्चंस करवाऊंगा तो आपको अलग ही मजा आएगा, आनंद आएगा कि सर हां आपने बताया था dq / dt का मतलब होता है इंस्टेंटेनियस और यहां पर डिफरेंशिएशन

3:03 करना पड़ता है। और इसी करंट को एक बार लिखा जाता है I एवरेज। I एवरेज का बेसिक मतलब है टोटल चार्ज अपॉन में टोटल टाइम बस। टोटल चार्ज को टोटल टाइम से डिवाइड करो आपको एवरेज करंट। तो दो तरीके के करंट की बात की जाती है। इंस्टेंटेनियस एंड एवरेज करंट की बात की जाती है। बस याद रखना जब इंस्टेनियस करंट आपसे बोलेंगे तो आपको डिफरेंसिएशन करना पड़ेगा और एवरेज करंट में चिंता ही नहीं है। टोटल चार्ज अपॉन में टाइम। अब थोड़ा सा हम थोड़ा सा इसको इस फॉर्मूले को और एक्सटेंड कर देते हैं कि देखो जब हम क्लास 12th के चैप्टर वन में घुसे थे चैप्टर वन में तो सिखाया गया था कि चार्ज का फार्मूला होता है n * में E। तो करंट का फार्मूला क्या हो जाएगा? देखो, चार्ज अपॉन में टाइम। चार्ज को आप लिख सकते हो ne / टाइम। ध्यान रखना। चार्ज को ne लिख दिया बेटा। तो ne / में टाइम भी करंट का फार्मूला होता है। जहां पर n का बेसिक मतलब होता है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन प्यारे बच्चों। तो इस प्रकार से इस प्रकार से नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन इंटू में e अब कई लोग बोलेंगे हमें e का मतलब

3:48 नहीं पता। कोई बात नहीं बेटा आपके लिए अलग यूनिवर्स बनाया जाएगा जिसको e का मतलब नहीं पता। वैसे तो मैं बात करने वाला था कि जिसको e का मतलब नहीं पता वो नर्क में जाएगा। पर फिर मैंने कहा ये रहने दो। बच्चे बुरा मान जाएंगे। तो ne / t हो जाएगा बेटा। ठीक है ना? ये भी हमारे करंट का फार्मूला है। आप नोट करो फिर आगे धूम मचाते हैं। सो मेरे प्यारे बच्चों अब हम सीधा ओम्स लॉ की बात करेंगे। यह जो ओम साहब है, ओम साहब क्या कहते हैं? इस बात को समझिए। यह हम बचपन से जानते हैं कि ओम साहब क्या कहते हैं। ओम साहब कहते हैं कि अगर भैया तुम्हारे पास कोई वायर है। जैसे मैंने कहा ये मेरे पास एक वायर है। और पोटेंशियल डिफरेंस लगाने का मतलब है कि आपने एक सेल लगा दिया। बेटा होता क्या है एक्चुअली में? ये जो सेल है सेल इस सेल की एक खास बात है। इस सेल का एक प्लेट पॉजिटिव होता है। दूसरा प्लेट नेगेटिव होता है। तो हम ऐसा मानते हैं कि सेल की वजह से हमारे वायर का एक तरफ पॉजिटिव हो गया है और वायर का दूसरी तरफ नेगेटिव हो गया है। क्योंकि सेल का एक पॉजिटिव है,

4:34 दूसरा नेगेटिव। तो हमारे वायर के इस तरफ पॉजिटिव और इस तरफ नेगेटिव। तो हम बोलते हैं देखो इस तरफ पॉजिटिव है, इस तरफ नेगेटिव है। तो एक डिफरेंस है। इसी को बोला जाता है पोटेंशियल डिफरेंस क्रिएट होना। कुल मिला के कुछ नहीं। एक सेल जो है या एक बैटरी जो है प्लस और माइनस क्रिएट करता है। मतलब हम ऐसा कह सकते हैं कि इधर का हाई पोटेंशियल होगा। हम ऐसा कहते हैं कि भैया इधर का हाई पोटेंशियल है। हाई पोटेंशियल और नेगेटिव का मतलब भैया लो पोटेंशियल। आपको पता होना चाहिए। तो प्यारे बच्चों, हम ऐसा कहते हैं भैया एक तरफ हाई पोटेंशियल है, एक तरफ लो पोटेंशियल है। तो अब हो क्या रहा है जो हमारे ओम साहब कहना क्या चाहते हैं वो हम थोड़ा फील करेंगे। लेकिन हल्का सा बात को समझो कि जब एक सेल लगाते हैं तो होता क्या है? जब हम एक सेल लगाते हैं तो इस प्लस की तरफ इलेक्ट्रॉन अट्रैक्ट होंगे। वायर के अंदर होता है इलेक्ट्रॉन। इस वायर के अंदर इलेक्ट्रॉन होगा बेटा। आपको पता होगा कि दुनिया की हर चीज के अंदर इलेक्ट्रॉन होता है। तो ये कंडक्टर है। इसके अंदर इलेक्ट्रॉन है। तो ये इलेक्ट्रॉन जो है इलेक्ट्रॉन इस प्लस की तरफ अट्रैक्ट होगा।

5:21 अच्छा जी। यानी कि जब हम पोटेंशियल डिफरेंस लगाएंगे यानी जब हम एक सेल लगाएंगे तो इलेक्ट्रॉन अट्रैक्ट होंगे। और इलेक्ट्रॉन अट्रैक्ट होंगे तो इलेक्ट्रॉन का मोशन आएगा। मोशन और जब भी इलेक्ट्रॉन का मोशन आएगा तो करंट आएगा। यानी कि जब हम पोटेंशियल डिफरेंस लगाते हैं तो इलेक्ट्रॉन में मोशन आता है और मोशन से आता है करंट। तो लोगों ने ऐसे ही कह दिया। फिर ये ओम साहब ने कह दिया भैया व्हेनएवर यू अप्लाई पोटेंशियल डिफरेंस देयर इज़ करंट। बिल्कुल सही बात है। पोटेंशियल डिफरेंस इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू करंट। लेकिन रियल में क्या हो रहा है? पोटेंशियल डिफरेंस से इलेक्ट्रॉन में मोशन आ रहा है और मोशन की वजह से करंट आ रहा है। फिर बोला गया कि यहां पर एक कांस्टेंट आएगा जिसका नाम होगा रेजिस्टेंस। तो रेजिस्टेंस क्यों? जब ये इलेक्ट्रॉन मोशन करेंगे तो आप टक्कर खाएंगे। इधर-उधर टक्कर वक्कर खाएंगे। अब सोचो एक ही कमरे में 100 लोग अगर भागेंगे तो टक्कर तो खाएंगे। टक्कर खाएंगे तो रुकावट पैदा होगा। रुकावट पैदा होगा तो रेजिस्टेंस पैदा होगा। तो इसलिए बोलते हैं कि भैया यहां पर R फॉर रेजिस्टेंस। R का मतलब रेजिस्टेंस होता

6:07 है। अब यही हमारा ओम्स लॉ है। बहुत ही सिंपल सी बात आपको समझना है कि देखिए ओम्स लॉ कहता है ओम्स लॉ स्टेट्स दैट आप खुद भी पढ़ सकते हैं। स्टेट्स दैट द पोटेंशियल डिफरेंस अक्रॉस द वायर इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू करंट इन द वायर। और ये सब अभी एक नॉर्मल टेंपरेचर रेंज में होता है। अब मैं आपको बता रहा हूं नॉर्मल टेंपरेचर रेंज का मतलब क्या है? कि अगर बहुत हाई टेंपरेचर हो जाएगा तो ओम्स लॉ हमारा नहीं लगता है। तो ओम्स लॉ एक नॉर्मल टेंपरेचर रेंज के लिए है। V = IR अब प्यारे बच्चों यहां पर अब छोटी-छोटी बातों को हमें समझना है कि जो ये ओम साहब हैं इन्होंने कुछ गाना गाया। ओम साहब ने क्या गाना गाया उस बात को हम समझते हैं। ओम साहब ने कहा देखो यार मेरा जो लॉ है V = IR या फिर जो भी आप बोलते हैं V = R * में I इसके लिए उन्होंने ग्राफ बनाया और दुनिया को समझाया कि देखो जब तुम V और I के बीच का ग्राफ बनाओगे ना तो एक स्ट्रेट लाइन आना चाहिए। अगर स्ट्रेट लाइन आ रहा है तो ओम्स लॉ

6:53 वैलिड है क्योंकि वो डायरेक्टली प्रोपोर्शनल की बातें करते हैं और उन्होंने उन्होंने ये भी कहा कि अगर ये V है और ये I है और स्ट्रेट लाइन आ रहा है तो यहां पर अगर आप इस एंगल को कैलकुलेट करोगे ऐसे इसको स्लोप कहा जाता है स्लोप। अगर इस एंगल का tan थीटा निकालोगे तो रेजिस्टेंस के बराबर होगा। tan थीटा को उन्होंने स्लोप कहा बेटा स्लोप स्लोप। यानी हमने क्या सीखा? हमने यह सीखा कि भैया अगर V और I का ग्राफ है उसका एंगल tan थीटा यानी स्लोप रेजिस्टेंस के बराबर होता है। और बोला गया अगर कभी किसी का ऐसा ग्राफ आए स्ट्रेट लाइन ग्राफ आए तो वो होगा ओहमिक कंडक्टर। ओहमिक कंडक्टर। तो प्यारे बच्चों इसी को ओहमिक कंडक्टर कहा जाता है। जो ओम्स लॉ को फॉलो करें वो ओहमिक कंडक्टर होता है। अच्छा जी। अब मान लो किसी का ग्राफ ऐसा आ जाए। मैं एग्जांपल के तौर पे दूं आपको कि V और I के बीच का ग्राफ कुछ ऐसे हो जाए, टेढ़ा हो जाए। या हम ऐसे कहें कि भैया V और I का ग्राफ कुछ ऐसे

7:39 जाके ऐसे हो गया। तो आपको मैं एक बात क्लियरली बता दूं कि इस ग्राफ में यहां से ले यहां तक स्ट्रेट लाइन है। स्ट्रेट लाइन देखो स्ट्रेट लाइन है। ऑलमोस्ट ओ से लेके ए तक स्ट्रेट लाइन है। तो हम बोलेंगे देखिए ओ से लेके ए तक ही ओहमिक बिहेवियर है। ओमिक बिहेवियर ओमिक बिहेवियर है प्यारे बच्चों। जब प्यारे बच्चों हम ए से लेके आगे जाते हैं मान लो डी तक। तो ए से लेके डी तक हमारा नॉन ओमिक ये ओहमिक नहीं है बेटा। नॉन ओमिक रीज़न क्या है बेटा? ए से लेके ए के बाद आपका स्ट्रेट लाइन नहीं है। यानी स्ट्रेट लाइन तक ही आपका ओम्स लॉ वैलिड होगा। ए और डी ए से ले डी तक ओम्स लॉ वैलिड नहीं है। अब प्यारे बच्चों ओम साहब ने एक और बातें बोली तो जो ए से डी तक है नॉन ओमिक है या कह सकते हैं कि ये नॉन ओमिक कंडक्टर है। नॉन ओमिक कंडक्टर जो ओम्स लॉ को नहीं मान रहा है। तो ओम्स लॉ को ना मानने का ग्राफ क्या हो जाएगा? ग्राफ हो जाएगा आपका टेढ़ा। सीधा नहीं

8:25 होगा। अब मेरे प्यारे बच्चों यहां पर इसी ग्राफ का एक वैरायटी भी है जो कई बार एग्जाम में पूछा जाता है कि अगर हम यहां पर i लिख दे यहां पर v लिख दे तो क्या होगा? तो यहां पर दोबारा स्ट्रेट लाइन आएगा। लेकिन इस बार जब आप थीटा निकालोगे तो tan थीटा 1 / r के बराबर होगा। क्यों सर? देखो पहले v और i था। अगर आप फोकस करो अगर आप हल्की सी बुद्धि लगाओ तो पहले बेटा v और i था। अब बेटा i और v है तो उल्टा हो जाएगा। tan थीटा r की जगह tan थीटा 1 / r हो जाएगा। तो हमने सीखा ओमीकंडक्टर नॉन ओमकंडक्टर और हमने ये सीखा कि जब-जब स्ट्रेट लाइन रहेगा जब-जब स्ट्रेट लाइन रहेगा तब तक हमारा ओम्स लॉ वैलिड रहेगा। सो अब नेक्स्ट टॉपिक वो है जो हमने पहली बार इसको बचपन में देखा था। तो हम थोड़े से परेशान हो गए थे कि ये क्या भला है? देखो R का मतलब रेजिस्टेंस होता है। सब जानते हैं। यहां पर ये जो रो है रो इस रो को देख लो। यहां पर दिखाया गया है कि इसे रेजिस्टिविटी कहा जाता है। अब ये

9:11 रेजिस्टिविटी क्या होता है? ये समझते हैं। देखिए ये होता है प्रॉपर्टी ऑफ अ मटेरियल। अब तुम बोलोगे मुझे समझ नहीं आया प्रॉपर्टी ऑफ़ अ मटेरियल क्या है? अभी समझाऊंगा। और ये होता है डिफरेंट फॉर डिफरेंट मटेरियल। जैसे मैं एग्जांपल लेता हूं। तो मैंने कहा देखो यार हमारे पास ये कॉपर है। कॉपर हमारे पास ये कॉपर है तो इसकी रेजिस्टिविटी मान लो 40 है। और हमारे पास एक ये मान लो आयरन है आयरन लोहा तो इसकी रेजिस्टिविटी मान लो 60 है। तो कॉपर के लिए रेजिस्टिविटी अलग होगा। आयरन के लिए रेजिस्टिविटी अलग होगा। तो रेजिस्टिविटी होता है डिफरेंट फॉर डिफरेंट मटेरियल। लेकिन ये प्रॉपर्टी ऑफ़ मटेरियल होता है। इससे क्या मतलब है आपका? इससे ये मतलब है अगर मेरे पास छोटा सा लोहा है छोटा सा लोहा आयरन और उसकी रेजिस्टिविटी मान लो 60 है तो एक बहुत बड़े एक बहुत बड़े आयरन अगर एक बड़ा आयरन है तो उसकी रेजिस्टिविटी भी 60 रहेगी क्योंकि वो

9:57 प्रॉपर्टी ऑफ़ मटेरियल है अगर मटेरियल सेम है रेजिस्टिविटी 60 रेजिस्टिविटी 60 छोटा लोहा हो या बड़ा लोहा हो रेजिस्टिविटी सेम है लेकिन डिफरेंट फॉर डिफरेंट मटेरियल तो हमने क्या सीखा कि ये साइज वाइज पे डिपेंड नहीं करता रेजिस्टिविटी साइज वाइज पे डिपेंड नहीं करता वो प्रॉपर्टी ऑफ़ मटेरियल है यानी कि रेजिस्टिविटी हमारा साइज पे, लेंथ पे, एरिया पे रेजिस्टिविटी का कोई इतना फर्क होता नहीं है। तो याद रखना है आपको। अब रेजिस्टिविटी का रो = R = R L / A l का मतलब लेंथ ऑफ़ वायर। A का मतलब एरिया ऑफ़ क्रॉस सेक्शन। जैसे अगर ये कोई वायर है तो इस वायर की लेंथ क्या है? l और इसका जो एरिया ऑफ़ क्रॉस सेक्शन है, एरिया एरिया ऑफ़ क्रॉस सेक्शन का मतलब ये होता है दोस्तों। ये दिस दिस एरिया। है ना? ये वाला एरिया जो स्टार्टिंग का एरिया है, इसको क्रॉस सेक्शन बोलते हैं। तो फटाफट इस कांसेप्ट को नोट करो और धूम मचाते हुए आगे बढ़ते हैं। एकदम। सो प्यारे बच्चों करंट डेंसिटी हमारा अगला टॉपिक है। करंट डेंसिटी के लिए सिंबल चुना गया है J. अब

10:44 ये करंट डेंसिटी क्या होता है? देखो सपोज़ करो वी हैव अ वायर। सपोज़ करते हैं कि हमारे पास एक वायर है। तो हमें ये फील करना है कि इस वायर से इस वायर से अगर करंट जा रहा है I और इसका जो क्रॉस सेक्शनल एरिया है A एरिया जो है यहां पर A है। तो कुछ नहीं करना। J का मतलब होता है बेटा करंट पर यूनिट एरिया। J जो है करंट पर यूनिट एरिया हमारा होता है करंट डेंसिटी। अब तुम बोलोगे सर इसकी डेफिनेशन क्या है? है। डेफिनेशन ही यही है। करंट पर यूनिट एरिया। आप सिंपल लिख दीजिए। करंट पर यूनिट पर यूनिट क्रॉस सेक्शनल एरिया। क्रॉस सेक्शनल एरिया ऑफ द वायर ऑफ अ वायर। कितना करंट पर यूनिट एरिया जा रहा है वही करंट डेंसिटी होता है। अब करंट डेंसिटी के लिए मैं आपको कुछ बातें बता दूं कि अगर जब करंट डेंसिटी का फार्मूला I / A है। तो कई

11:30 बार हम करंट को ऐसे लिख सकते हैं J * में A लेकिन इनके बीच में डॉट प्रोडक्ट आता है। डॉट का मतलब क्या है? करंट इज़ स्केलर। तो यहां पर एक डॉट लगाना पड़ता है ja क्योंकि करंट = j * a हो जाएगा। तो ये आपको ध्यान रखना है। अच्छा कई लोग तो इसको ऐसे भी लिखते हैं डॉट को खोल के ऐसे लिखते हैं j * a * cos थीटा तो इसमें भी आपको परेशान होने की बात नहीं है। ये डॉट प्रोडक्ट की प्रॉपर्टी होती है कि अगर कोई स्केलर है तो j. A का मतलब j cos थीटा होगा। जहां पर ये जो एंगल है एंगल ये j और a के बीच का एंगल होगा। सर समझ नहीं आया? तो मैं आपको सिंपल एग्जांपल देता हूं कि मान लो ये हमारा वायर है वायर। तो आप ऐसा मान लेना कि अगर करंट इस तरफ है तो इसका एरिया वेक्टर किस तरफ है? तो एरिया वेक्टर इस तरफ है। तो इक्वल मिला के करंट और एरिया वेक्टर के बीच का एंगल आपको लेना है। करंट और एरिया वेक्टर के बीच का एंगल लेना। तो एंगल लिख देता हूं। मैं एंगल ले लेना आप। करंट वेक्टर एंड एरिया वेक्टर के

12:17 बीच। अब तुम बोलोगे करंट तो वेक्टर होता ही नहीं है। पर करंट को हम मानेंगे। लेट कर लेंगे। लेट अस्यूम एज अ वेक्टर। लेट अस्यूम एज अ वेक्टर। करंट को एक वेक्टर की तरह मानना और जिस तरफ करंट है और जिस तरफ एरिया है उन दोनों के बीच का एंगल लेते हैं। इस क्वेश्चन में बाय चांस करंट और एरिया के बीच में एंगल 0° है या 0° है एंगल। ठीक है? तो ये आपको रेडी रहना है करंट डेंसिटी को लेके। सो प्यारे बच्चे अब हमें छोटे-छोटे टर्म सीखने हैं कि भैया ये कंडक्टेंस किस को कहते हैं? देखिए कंडक्टेंस इज़ बेसिकली वन बाय रेजिस्टेंस। जो रेजिस्टेंस का उल्टा है उसी को कंडक्टेंस कहते हैं। सिंबल के फॉर्म में जानेंगे। तो कंडक्टेंस के लिए g इस्तेमाल किया गया है। g = 1 / रेजिस्टेंस। तो कंडक्टेंस इज बेसिकली रेजिस्टेंस का उल्टा। फिर प्यारे बच्चों एक छोटा सा टॉपिक आता है कंडक्टिविटी। तो कंडक्टिविटी के लिए सिग्मा बोला गया है सिग्मा। तो ये होता है वन बाय रेजिस्टिविटी रेजिस्टिविटी

13:02 को रो बोला गया है। तो सिग्मा = 1 / रो जहां कंडक्टिविटी का मतलब सिग्मा होता है। अब प्यारे बच्चों ये छोटे-मोटे टॉपिक जानने के बाद हम जंप कर सकते हैं अपने मेन टॉपिक पे जो हमारा इंपॉर्टेंट टॉपिक है। क्या टॉपिक है प्यारे बच्चों? इस टॉपिक को बड़े ईमानदारी से समझना। रिलेशन बिटवीन इलेक्ट्रिक फील्ड एंड पोटेंशियल। सर ये क्या है? समझ नहीं आ रहा। मान लो हमारे पास मान लो कि हमारे पास ये एक वायर है। तो इस वायर के अंदर आपको पता होगा जब हम पोटेंशियल डिफरेंस लगाते हैं V पोटेंशियल डिफरेंस मान लो V है तो एक हिस्सा पॉजिटिव हो जाता है। दूसरा हिस्सा नेगेटिव हो जाता है। अगर मेरे प्यारे बच्चों एक हिस्सा पॉजिटिव हो गया, दूसरा हिस्सा नेगेटिव हो गया तो पॉजिटिव से नेगेटिव की तरफ हमारा इलेक्ट्रिक फील्ड चलेगा। प्लस से माइनस की तरफ इलेक्ट्रिक फील्ड चलेगा। तो हमें इस पोटेंशियल इस V के लिए और इस E के लिए एक रिलेशन ढूंढना है। तो मान लेते हैं रिलेशन ढूंढने का बड़ा आसान तरीका है। हम मान लेते हैं कि भैया वायर की जो लेंथ है वायर

13:49 की लेंथ है l वायर की लेंथ है l तो रिलेशन क्या निकलता है? जो पोटेंशियल डिफरेंस होगा वो इलेक्ट्रिक फील्ड * लेंथ होगा। v = e तो v = इलेक्ट्रिक फील्ड * लेंथ ऑफ़ वायर। तो v = e * में l तो रिलेशन बिटवीन इलेक्ट्रिक फील्ड एंड पोटेंशियल। आप पढ़ सकते हो कि मान लेते हैं कि कंडक्टर के अंदर इलेक्ट्रिक फील्ड e है और लेंथ ऑफ द वायर l है तो हमारा जो पोटेंशियल होगा वो e * l होगा। बहुत ही इंपॉर्टेंट टॉपिक है। नोट कर लो। सो हमारे पास एक टॉपिक है वेक्टर फॉर्म ऑफ ओम्स लॉ। ये क्या है? समझा दो एक बार। देखो जैसे हम जानते हैं v = ये हमारा सिंपल ओम्स लॉ होता है। फिर हम जानते हैं कि अभी हमने पढ़ा था बहुत छोटी सी बात हमने पढ़ी थी कि v का मतलब होता है इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में लेंथ। ये बात भी हम जानते हैं। और तीसरी जो हम सबसे इंपॉर्टेंट जानते हैं कि रेजिस्टेंस = रोल a। तो अभी तक हमने तीन इक्वेशन को पढ़ा। तो जब हम इन तीनों इक्वेशन को आपस में

14:36 जोड़ देते हैं तो हम कहते हैं वेक्टर फॉर्म ऑफ ओम्स लॉ। कैसे? बड़ा आसान है। आप क्या करो? पुट बहुत सिंपल बता रहा हूं मैं आपको। पुट इक्वेशन टू एंड इक्वेशन थ्री इन वन। सर समझ नहीं आया। आप v की जगह यहां पुट कर दो। समझना ध्यान से। और r की जगह यहां पुट कर दो। देखो खेल हो जाएगा खेल। कैसे? तो V की अभी मैं यहां उठा रहा हूं देखो। तो मुझे V की जगह पर ये वाला पुट करना है। EL तो EL इज़ इक्वल टू फील करना। I की जगह I रहेगा अपनी जगह। लेकिन इस R की जगह पर मुझे ये पुट करना है रो LL / A. अब कई लोगों को समझ नहीं आया होगा बेवकूफों। V = IR में हम V की जगह पर V की जगह पर EL लिख सकते हैं। और R की जगह पर ये लिख सकते हैं। तो V की जगह पर EL लिख सकते हैं। E का मतलब इलेक्ट्रिक फील्ड होता है। ठीक है बेटा? तो V की जगह पर El लिख सकते हैं। R की जगह पर लिख सकते हैं रोL / A। फिर कुछ नहीं दोस्तों। उसके बाद एकदम खेल एकदम मजा

15:22 आ जाएगा। एकदम l से L कट जाएगा। तो यहां से आपको मिल जाएगा E = I ठीक है? ये हो गया रो। रो और नीचे A है तो A इसके नीचे लिख दीजिए। तो जब आप A इसके अंदर लिख देंगे ना AI के नीचे ला देंगे आप तो ये बन जाएगा करंट डेंसिटी J तो इलेक्ट्रिक फील्ड = J * में रो तो यहां से देखो एक इक्वेशन बन के आती है इलेक्ट्रिक फील्ड = J वेक्टर * में रो। हम क्या कर सकते हैं? देखो इस रो को इधर भेज देंगे। तो ये हो जाएगा 1 / रो * में इलेक्ट्रिक फील्ड = J वेक्टर। ये रो को हमने इधर भेज दिया। और 1 / रो को हम सिग्मा बोल सकते हैं। तो सिग्मा = इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में J वेक्टर। 1 / R यानी रेजिस्टिविटी को हम सिग्मा बोल सकते हैं कंडक्टिविटी। तो इसी को प्यारे बच्चों बोला जाता है ओम्स लॉ का वेक्टर फॉर्म जो कभी-कभी एग्जाम में आ सकता है। आप प्लीज इसे नोट कर लीजिए। आप बताओ इस सीरीज को कंटिन्यू करना है कि नहीं करना? 60 मिनट सीरीज कंटिन्यू होना चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर हां तो अपना नाम कमेंट

16:07 करो। सर मेरा नाम ये है और मैं चाहता हूं कि सीरीज कंटिन्यू रहे और वीडियो को प्लीज लाइक, कमेंट और हाइप जरूर करना। लव यू ऑल। पूरी जान लगा रहा हूं आपके लिए। आप यकीन नहीं मानोगे सुबह शाम सिर्फ आपके लिए मेहनत कर रहा हूं। आपसे बहुत प्यार करता हूं। आई लव यू मेरे दोस्तों। फिर हम आगे बढ़ते हैं। सो प्यारे बच्चों अब हमारा टॉपिक है ड्रिफ्ट वेलोसिटी। लेकिन ड्रिफ्ट वेलोसिटी समझने से पहले कुछ मैं आपको बेसिक बातें बता दूं जो बचपन से हर बच्चे को पता होता है कि अगर हमारे पास कोई वायर है तो वायर के अंदर बहुत सारे इलेक्ट्रॉन होंगे। लेकिन अभी हमने कोई बैटरी नहीं लगाया बेटा। अभी यहां पर कोई बैटरी नहीं है। नो बैटरी मतलब विदाउट पोटेंशियल डिफरेंस। यहां पर कोई बैटरी नहीं है। तो जब यहां पर कोई बैटरी नहीं होता है ना तो रेंडम मोशन होता है। रेंडम मोशन ऑफ इलेक्ट्रॉन्स जो सारे इलेक्ट्रॉन्स हैं वो रेंडम मोशन में होते हैं। अब रेंडम मोशन में होने की वजह से क्या होगा? रेंडम मोशन में होने की वजह से इधर-उधर टक्कर फक्कर खाएंगे और सारा काम खराब हो जाएगा। तो विदाउट पोटेंशियल डिफरेंस रैंडम मोशन ऑफ

16:54 इलेक्ट्रॉन इनिशियल एवरेज वेलोसिटी इज जीरो। यानी कि ये टक्कर-फक्कर खाते रहते हैं। एक इलेक्ट्रॉन ऐसे गया ऐसे टक्कर खा के वापस वहीं पर आ गया। कुल मिला के जैसे मैं एक इलेक्ट्रॉन हूं तो मैंने इधर गया टक्कर खाया। इधर गया टक्कर खाया। इधर गया टक्कर खाया वहीं पर आ गया वापिस। अगर वहीं पर आ गया तो फायदा क्या हुआ? तो हम ऐसा मान लेते हैं इनिशियल एवरेज वेलोसिटी इज़ ज़ीरो। कि अगर कोई पोटेंशियल डिफरेंस नहीं है तो इनके इनकी जो इनिशियल वेलोसिटी है कोई काम की नहीं है। तो इनिशियल एवरेज वेलोसिटी इज़ ज़ीरो। यानी कि पहले पार्टिकल की वेलोसिटी, दूसरे पार्टिकल की वेलोसिटी, तीसरे पार्टिकल, चौथे, पांचवे 10 पे उन सबका एवरेज लेंगे तो आंसर जीरो आएगा। तो पहला पॉइंट ये है जो आपको समझना है इस टॉपिक के लिए ड्रिफ्ट वेलोसिटी के लिए। इसको बोला जाता है मैकेनिज्म। मैकेनिज्म। इसको बोलते हैं मैकेनिज्म ऑफ करंट। मैकेनिज्म ऑफ करंट। करंट के पीछे मैकेनिज्म क्या है? मैकेनिज्म ऑफ करंट बेटा कि ये मैकेनिज्म है कि स्टार्टिंग में इनकी वेलोसिटी ज़ीरो होती है। लेकिन

17:39 प्यारे बच्चों, सेकंड पॉइंट जो आपको समझना है कि जब एक बैटरी लगाते हैं, तो बैटरी से पोटेंशियल डिफरेंस पैदा होता है। एक तरफ प्लस और दूसरी तरफ माइनस। तो जो हमारे इलेक्ट्रॉन है जैसे ये कोई इलेक्ट्रॉन है तो ये जो इलेक्ट्रॉन है प्यारे बच्चों इस इलेक्ट्रॉन को आगे धक्का लगता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन एक नेगेटिव है बेटा इस इलेक्ट्रॉन को ये प्लस खींचेगा ये प्लस खींचेगा अपनी तरफ खींचेगा मतलब ड्रिफ्ट होगा ड्रिफ्ट ड्रिफ्ट का मतलब होता है घसीटा लगना खिंचाव तो इलेक्ट्रॉन को ड्रिफ्ट मिलेगा ड्रिफ्ट तो इसके पास होगा अब ड्रिफ्ट वेलोसिटी अब इसके पास होगा ड्रिफ्ट वेलोसिटी अब ड्रिफ्ट वेलोसिटी की वजह से ड्रिफ्ट वेलोसिटी है और हम कह सकते हैं सिंपल भाषा में एक एक्सीलरेशन आ गया इसके पास और एक्सीलरेशन का फार्मूला होता है बेटा - e अपॉन में मास यहां जहां पर e का मतलब इलेक्ट्रॉन का चार्ज है। कैपिटल e का मतलब इलेक्ट्रिक फील्ड और m का मतलब मास है। इस एक्सीलरेशन की कोई डेरिवेशन नहीं है। एक्सीलरेशन का फार्मूला होता ही है। तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। यानी कुल मिला के कि इसके पास ड्रिफ्ट वेलोसिटी और

18:25 एक्सीलरेशन आ जाएगा। अब इसकी वेलोसिटी ज़ीरो नहीं होगी और वेलोसिटी ज़ीरो नहीं होगी तो हमारे पास करंट आएगा। नाउ वी हैव करंट। तो जब हम पोटेंशियल डिफरेंस लगाते हैं, एक बैटरी लगाते हैं, तो बैटरी से ड्रिफ्ट वेलोसिटी पैदा होता है और ड्रिफ्ट वेलोसिटी की वजह से ही करंट आता है। अब प्यारे बच्चों, हमें ड्रिफ्ट वेलोसिटी के लिए डेरिवेशन करना होता है। तो डेरिवेशन बड़ा आसान होता है। मैं आपको समझा रहा हूं। कि हमने बोला कि भैया हमारे पास एक वायर है और इस वायर के अंदर बहुत सारे पार्टिकल हैं। बहुत सारे पार्टिकल इस वायर के अंदर बहुत सारे पार्टिकल हैं। बहुत सारे पार्टिकल और ये लेट पार्टिकल मूव्स विद इनिशियल वेलोसिटी u और पार्टिकल की जो इनिशियल वेलोसिटी है u है और कोलाइड कर रहे हैं उसके लिए टाइम हम बोल रहे हैं t और वो कोलाइड भी कर रहे होंगे। तो हम बोलेंगे देखो भैया अगर मुझे इनिशियल वेलोसिटी पता है पार्टिकल्स की और पार्टिकल्स का मुझे टाइम पता है तो अगर मैं यहां पर एक बैटरी लगा दूं बैटरी एक सेल लगा दूं तो क्या ये इलेक्ट्रॉन अब आगे

19:11 बढ़ेंगे? आगे बढ़ेंगे तो मैं इलेक्ट्रॉन्स की फाइनल वेलोसिटी लिख सकता हूं। हमने बचपन में एक फार्मूला पढ़ा है v = u + at जहां v का मतलब फाइनल वेलोसिटी होता है। तो हम बोलेंगे चलो नाउ हम कैलकुलेट करेंगे पहले वाले की फाइनल वेलोसिटी v1 = u1 + a t1 दूसरे वाले की v2 = u2 + a t2 ऐसे करते-करते हम nथ पार्टिकल बहुत सारे पार्टिकल हैं। vn vn मतलब nथ पार्टिकल का भी निकाल सकते हैं। टू ऑफ इनिशियल प्लस एक्सीलरेशन टाइम थ्री टाइम टाइम n आएगा ये tn तो ऐसे करके ए यार ए यार सुबह-सुबह आज ऐसे करके हम सभी पार्टिकल की वेलोसिटी का फार्मूला लिख सकते हैं लेकिन मुझे टोटल निकालना है बेटा तो हम इन सबको ऐड करेंगे सम अप करेंगे सम इन सबको हम सम करेंगे ऐड करेंगे तो क्या होगा देखो ऐड करेंगे तो ऐसा कुछ आएगा v1 + v2 + vn मतलब हमें

19:56 लेफ्ट हैंड साइड का n करना ऐड करना पड़ेगा v1 v2 vn और जब हम लेफ्ट हैंड साइड को ऐड करेंगे तो हमारा राइट हैंड साइड भी n ऐड हो जाएगा कैसे u1 1 + u2 + u3 फिर a t1 + t2 + t3 ऐसे तो कैसे हुआ है देखो फील करना ध्यान से कैसे ऐड किया मैंने देखो इन सबको एक साथ ऐड किया फिर मैंने इन सबको ऐड एक साथ ऐड किया आपको दिख रहा होगा u1 u2 un अब इन सबके अंदर a कॉमन है बेटा a जो है ना कॉमन है तो a को कॉमन लेके इन सबको ऐड किया t1 t2 t3 tn सबको ऐड किया तो हमने टोटल निकालने के लिए ऐड किया अब प्यारे बच्चों जब हमारे पास बहुत सारे पार्टिकल होते हैं बहुत सारे ऑप्शन होते हैं बहुत सारे पार्टिकल होते हैं ना तो हम एवरेज लेते हैं बेटा। नाउ वी विल टेक एवरेज। हम इसका एवरेज लेंगे क्योंकि यहां पर बहुत सारे पार्टिकल हैं। इतनी सारी चीजों के लिए हम एवरेज लेते हैं। तो एवरेज लेने के लिए हमें बस इसको n से डिवाइड करना

20:41 पड़ेगा। ये जो ओ हो हो हो हां ये जो हमने इक्वेशन लिखा है ना v1 + v2 + vn इसको n से डिवाइड करना पड़ेगा। एवरेज लेने के लिए n मतलब नंबर ऑफ़ पार्टिकल। u1 + u2 + जो u un होगा हमारा उसको भी n से डिवाइड करना पड़ेगा। + a t1 + t2 + जो भी है हमारा tn जो भी है इसको भी n से डिवाइड करना पड़ेगा। सो प्यारे बच्चों जब हम n से डिवाइड करेंगे तो क्या होगा? देखो ये हो जाएगा एवरेज वेलोसिटी ऑफ़ ऑल द पार्टिकल V1 V2 जितने भी पार्टिकल हैं उन सबका एवरेज वेलोसिटी उन सबके एवरेज वेलोसिटी को हम बोलेंगे vd vd मतलब ड्रिफ्ट वेलोसिटी और प्यारे बच्चों ये जो एवरेज वेलोसिटी है ये तो ज़ीरो होता है ये इनिशियल है इनिशियल एवरेज वेलोसिटी इज़ ज़ीरो ये मैंने आपको स्टार्टिंग में ही बता दिया था कि इनिशियल वेलोसिटी का जो एवरेज है उसको ज़ीरो माना जाता है क्योंकि वो रैंडम मोशन की वजह से होता है। तो देखो ये वाला जो हमारा एवरेज

21:27 वेलोसिटी आ रहा है सभी पार्टिकल्स की जो फाइनल वेलोसिटी का एवरेज है सभी पार्टिकल्स के जो फाइनल वेलोसिटी का एवरेज है सभी पार्टिकल्स के फाइनल वेलोसिटी के एवरेज को ड्रिफ्ट वेलोसिटी बोलेंगे इनिशियल ज़ीरो होगा यहां पर बचेगा a बचेगा प्यारे बच्चों एक्सीलरेशन और ये बेटा टाइम का एवरेज होगा t1 t2 / n ये टाइम का एवरेज है टाऊ एवरेज इसको बोलते हैं एवरेज टाइम बिटवीन टू सक्सेसिव कोलीजन एवरेज टाइम बिटवीन टू सक्सेसिव कोलीजन टू सक्सेसिव कोलीजन अब प्यारे बच्चों एक बात ध्यान रखना इसी को इसी को रिलैक्सेशन टाइम भी कहा जाता है। रिलैक्सेशन टाइम रिलैक्सेशन टाइम भी इसी को कहा गया है। अब प्यारे बच्चों खोल के लिखेंगे तो हमें ड्रिफ्ट वेलोसिटी का फार्मूला मिल जाएगा। क्यों? मैंने ऊपर आपको एक्सीलरेशन का फार्मूला बताया था। - eल e और ये टाइम का एवरेज और इसको आल्सो रिलैक्सेशन टाइम भी कहा जाता

22:12 है। तो बेटा ये ड्रिफ्ट वेलोसिटी का फार्मूला हमने ड्राइव किया। हमें टाइम लगा पर हमने बहुत आसान तरीके से बहुत सिंपल तरीके से डेरिवेशन करी। गिनती से देखोगे तो चार लाइन की डेरिवेशन है। किताबों में इसी को 20-20 लाइन में लिखते हैं। कोई टेंशन वाली बात नहीं है। बस सारी बातों को याद रखना। और हमने पढ़ा ड्रिफ्ट वेलोसिटी या मैकेनिज्म ऑफ करंट इन अ कंडक्टर। मैकेनिज्म ऑफ़ करंट इन अ कंडक्टर। आप नोट कर लो। फिर हम आगे बढ़ते हैं। आप बताओ इस सीरीज को कंटिन्यू करना है कि नहीं करना? 60 मिनट सीरीज कंटिन्यू होना चाहिए कि नहीं चाहिए? अगर हां तो अपना नाम कमेंट करो। सर मेरा नाम ये है और मैं चाहता हूं कि सीरीज कंटिन्यू रहे। और वीडियो को प्लीज लाइक, कमेंट और हाइप जरूर करना। लव यू ऑल। पूरी जान लगा रहा हूं आपके लिए। आप यकीन नहीं मानोगे सुबह शाम सिर्फ आपके लिए मेहनत कर रहा हूं। आपसे बहुत प्यार करता हूं। आई लव यू मेरे दोस्तों। सो प्यारे बच्चों, हमारे पास एक बहुत ही शानदार टॉपिक है। टॉपिक का नाम है रिलेशन बिटवीन करंट एंड ड्रिफ्ट वेलोसिटी। जैसा हम जानते हैं कि जब किसी वायर के अंदर जैसे कोई वायर है, इसके अंदर ड्रिफ्ट आएगा, ड्रिफ्ट। इलेक्ट्रॉन में ड्रिफ्ट आएगा, तो करंट आएगा। तो, ड्रिफ्ट वेलोसिटी और करंट

22:59 में कुछ ना कुछ रिलेशन तो होगा। लेकिन, हम जानते हैं कि भई करंट का जो बेसिक फार्मूला है, करंट का बेसिक फार्मूला होता है चार्ज पर यूनिट टाइम। तो, हमें एक वायर के अंदर चार्ज निकालना पड़ेगा। तो, हम लोगों ने क्या दिमाग लगाया? हमने बोला कि मान लो हमारा जो n है, नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन है पर यूनिट वॉल्यूम। यानी एक छोटे से वॉल्यूम में पर यूनिट वॉल्यूम में हमारा n नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन है। अब टोटल वॉल्यूम की बात करें तो देखो वॉल्यूम का फार्मूला हमेशा होता है एरिया इंटू में लेंथ। तो एरिया ऑफ़ क्रॉस सेक्शन और लेंथ को मल्टीप्लाई करेंगे टोटल वॉल्यूम आएगा। तो हम कह रहे हैं कि हमने n माना है पर यूनिट वॉल्यूम में। अच्छा जी। यानी कि एक वॉल्यूम में n माना। तो al वॉल्यूम में क्या होगा? n * में al n * में al तो वही कह रहा हूं मैं देखो। हमने यूनिट वॉल्यूम में n इलेक्ट्रॉन माना है। तो हमारा वॉल्यूम al है तो हमें al से n को

23:45 मल्टीप्लाई करना पड़ता है। इसको रट्टा ही मार लो अगर समझनी समझने वाली बहुत सिंपल सी बात है कि एक वॉल्यूम में n है तो al वॉल्यूम में aln होगा। जैसे एक वॉल्यूम में अगर n है तो 10 वॉल्यूम में 10n होगा। तो al वॉल्यूम में क्या होगा? aln बहुत बढ़िया जी। तो मैं बहुत सिंपल भाषा में समझाने का प्रयास कर रहा हूं कि हमने माना कि n है एक वॉल्यूम में। तो टोटल पूरे में कितना होगा? टोटल इलेक्ट्रॉन कितने होंगे? aln। और जब हमें इलेक्ट्रॉन पता चल गया तो चार्ज निकालने के लिए बस e से मल्टीप्लाई किया जाता है। कैसे? हम लोगों ने पढ़ा है q = नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन * में e इसी को तो क्वांटाइजेशन ऑफ चार्ज कहते हैं कि नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन को e से मल्टीप्लाई करोगे तो आपको चार्ज मिलेगा। अब एक बार अगर हमें चार्ज का ज्ञान हो गया बेटा, तो बहुत आसान तरीके से लिख सकते हैं। करंट = q / t तो चार्ज की वैल्यू कितनी है? Al na है चार्ज की वैल्यू। और टाइम क्या है? टाइम t। अब कुछ नहीं करना। देखो यहां पर आपको l दिख

24:31 रहा होगा। l मतलब डिस्टेंस और नीचे दिख रहा होगा टाइम। तो a अपनी जगह रहेगा, n अपनी जगह रहेगा, e अपनी जगह रहेगा। ये जो डिस्टेंस अप टाइम है, इसी को हम वेलोसिटी बोलेंगे बेटा। क्यों? क्योंकि इलेक्ट्रॉन अगर यहां से चलना स्टार्ट करे, समझना इस बात को। इलेक्ट्रॉन अगर यहां अबे यार समझ ही नहीं रहे इस बात को। इलेक्ट्रॉन अगर यहां से चलना स्टार्ट करे तो कितना डिस्प्लेसमेंट कवर करेगा? l के बराबर। तो डिस्प्लेसमेंट अपॉन में टाइम ही तो वेलोसिटी होता है। ये डिस्ट डिस्प्लेसमेंट अपॉन में टाइम वेलोसिटी होता है। क्योंकि चार्ज की जगह पर हमने alne पुट किया है। Alne जहां l का मतलब लेंथ है। लेंथ मतलब डिस्प्लेसमेंट। तो बेटा इसी को बोलते हैं करंट और ड्रिफ्ट वेलोसिटी का फार्मूला। I = एरिया ड्रिफ्ट वेलोसिटी को बोलते हैं बेटा VD। जहां मैं आपको बता दूं कि हमने जो ये पढ़ा है ना कहां पढ़ा है? ये रहा ये जो हमने पढ़ा है ड्रिफ्ट वेलोसिटी एवरेज। तो ड्रिफ्ट वेलोसिटी क्या है बेटा? VD। VD का मतलब है ड्रिफ्ट वेलोसिटी। ड्रिफ्ट वेलोसिटी बेटा ये है एवरेज वेलोसिटी ऑफ़ ऑल

25:16 द इलेक्ट्रॉन। एवरेज वेलोसिटी ऑफ़ ऑल द इलेक्ट्रॉन। सभी इलेक्ट्रॉन का जो सभी इलेक्ट्रॉन का जो एवरेज वेलोसिटी है, उसी को हम ड्रिफ्ट वेलोसिटी बोलते हैं कि ऑन एन एवरेज इलेक्ट्रॉन कितनी वेलोसिटी से चलता है। और हमारा जो रिलेशन है, ये रिलेशन भी आपको मैंने बता दिया कि क्या रिलेशन होता है? करंट एंड ड्रिफ्ट वेलोसिटी में आप नोट करो फिर आगे बढ़ेंगे। सो प्यारे बच्चों अगला टॉपिक हमारे पास है प्रूफ ऑफ ओम्स लॉ एंड डेरिवेशन ऑफ रेजिस्टिविटी। ये क्या है? कुल मिला के हमें रेजिस्टिविटी के लिए ना एक फार्मूला ड्राइव करना होता है। तो इसके लिए बड़ा आसान तरीका मैं आपको बताऊंगा। आपको मजा आ जाएगा। आप बोलना कि भ ओम्स लॉ को हमें प्रूफ करना है। तो ओम्स लॉ को प्रूफ करने का मतलब क्या है? देखो ओम्स लॉ कहता है कि आपका रेजिस्टेंस या सिंपल भाषा में रेजिस्टिविटी जो है रेजिस्टेंस एंड रेजिस्टिविटी ना एक कांस्टेंट है। कांस्टेंट चीज है। आपको याद होगा। सो हम यह बात कर रहे थे कि जो ओम्स लॉ के प्रूफ

26:02 से मेरा बेसिक मतलब क्या है कि आपका रेजिस्टेंस एंड रेजिस्टिविटी एक कांस्टेंट चीज है। जो रेजिस्टेंस है रेजिस्टिविटी है एक कांस्टेंट चीज है। कांस्टेंट का मतलब होता है जो चेंज ना हो। अभी बस मन में रखो कि सर हमें ये प्रूफ करना है। तो इसके लिए बड़ा आसान तरीका मैं आपको बताऊंगा। आपको मजा आ जाएगा देख के। देखो आप लोगों ने पढ़ा है कि अभी ड्रिफ्ट वेलोसिटी का फार्मूला पढ़ा। I करंट का फार्मूला पढ़ा। i = v ड्रिफ्ट na जहां n का मतलब है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन पर यूनिट वॉल्यूम। ठीक है ना? अच्छा n के अलग-अलग नाम भी होते हैं। नंबर डेंसिटी भी कहते हैं इसको। नंबर डेंसिटी। कई लोग तो इसको पता है चुपके से क्या बोलते हैं? चुपके से। इलेक्ट्रॉन डेंसिटी। सोचते हैं कि टीचर तो पढ़ाएगा नहीं। पर भैया टीचर यहां एक्सपीरियंस बैठा हुआ है। तो N को इलेक्ट्रॉन डेंसिटी और नंबर डेंसिटी भी बोलते हैं। और N का एक नाम मैंने बताया नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन पर यूनिट वॉल्यूम। तो ये हमने पढ़ा। तो हम बोलेंगे भाई हम इसी से काम करेंगे जो करेंगे। तो सबसे पहले तो हम बोलते हैं देखो ओम्स लॉ कहता है V = IR। तो यहां से

26:47 I = हो जाएगा V / रेजिस्टेंस। V / रेजिस्टेंस। तो यहां पर सबसे पहले करंट की जगह पर लिखना आप वोल्टेज अपॉन में रेजिस्टेंस। सुनते रहो। फिर आपने अभी मुझसे थोड़ी देर पहले पढ़ा था। तो हमने क्या-क्या यूज़ किया? हम जो यूज़ कर रहे हैं यहां लिखते जा रहे हैं हम जो V यूज़ कर रहे हैं। तो पहली इक्वेशन हम ये यूज़ कर रहे हैं। और दूसरी हम क्या इस्तेमाल कर रहे हैं? देखो कि हमने पढ़ा था V = होता है इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में लेंथ। याद करो पढ़ा था हमने। V = इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में लेंथ। तो यहां पर V की जगह पर लिख देना इलेक्ट्रिक फील्ड इंटू में लेंथ / में रेजिस्टेंस। तो पहले अभी हमने करंट को फील किया। करंट = VR V = El / रेजिस्टेंस। हमने ड्रिफ्ट वेलोसिटी को फील करो। ड्रिफ्ट वेलोसिटी। ड्रिफ्ट वेलोसिटी का फार्मूला तो कैसे पढ़ा था आपने? - E पर अभी हम माइनस साइन की बात नहीं करेंगे। अभी हम मैग्नीट्यूड की बात करेंगे। इलेक्ट्रॉन नेगेटिव होता है। सबको पता है। कोई बात नहीं जी। तो हम e बोलेंगे e अपॉन में मास / टाऊ एवरेज टाइम बिटवीन टू सक्सेसिव कोलीजन तो भैया ड्रिफ्ट वेलोसिटी का

27:33 फार्मूला लिखा है मैंने डरने वाली बात नहीं है अब ये n की जगह n रहने दो e की जगह e रह रहने दो a की जगह a रहने दो तो सर ये वाला स्टेप समझ में आ गया सर इस वाले स्टेप में क्या है बताओ इस वाले स्टेप में बहुत सिंपल खेले देखो यहां पर आपको दिखेगा e और e² दिखेगा ठीक है जी फिर आपको दिखेगा एरिया एरिया दिखेगा फिर आपको दिखेगा n आपको n दिखेगा आपको टाऊ दिखेगा आपको e दिखेगा आपको m दिखेगा तो सर आपने कुछ भी नहीं किया। हां जी। इन सबको सेम टू सेम नीचे लिख दिया। बस e * में e जो है हमारा e² हो गया। अब जादू देखो। e से e को बजा दूंगा मैं। जब मैं e से e को बजा दूंगा तो मेरे पास क्या बचेगा? ये समझने वाली बात है। मेरे पास ये बचेगा कि अब मैं इसको पलटूंगा। सर पलटने से क्या होगा? देखो पलट ही तो मजा आता है। कभी ट्राई करना बेटा। देखो ये r / l हो जाएगा। और ये हो जाएगा m / ne² टाऊ। देखो

28:20 n e² टाऊ और a पलट जाएगा। ई से ही कट हो चुका है। अब यहां पर एक सबसे खास बात क्या है? जल्दी देखो जादू। जादू देखो जादूद होने समझ नहीं आएगा। इस एल को मैं यहां भेज रहा हूं। एकदम से दर्द होगा। कुछ बच्चों को दर्द होगा। देखना जैसे ही ये एल यहां जाएगा जादू हो जाएगा। ये बन जाएगा l / a। तो अगर हम कंपेयर करें बचपन में जो हमने पढ़ा था कंपेयर अगर हम कंपेयर करें r = रेजिस्टिविटी l / a रेजिस्टिविटी l / a से कंपेयर करें तो देखो r = इधर है l / a r की जगह पर r है। l / a की जगह पर l / a है। तो प्यारे बच्चों ये जो रेजिस्टिविटी है ध्यान देना। ये जो रेजिस्टिविटी है इसके बराबर आएगा। तो हम एक प्रकार से रेजिस्टिविटी का डेरिवेशन कर लेंगे। तो रेजिस्टिविटी का डेरिवेशन क्या आ जाएगा? m / ne² टाऊ। तो बेटा यही हमें करना था बेटा। देखो हमने क्या प्रूफ कर दिया? हमने ये प्रूफ कर दिया कि हमारी जो रेजिस्टिविटी है वो एक कांस्टेंट चीज है।

29:07 क्यों? किसी भी इसको लिख देंगे हम कांस्टेंट। क्योंकि भैया किसी भी वायर के लिए इलेक्ट्रॉन का मास कभी चेंज नहीं होगा। किसी वायर के लिए नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन कभी चेंज नहीं होगा। किसी वायर के लिए E की वैल्यू कभी चेंज नहीं होगी। किसी वायर के लिए टाइम चेंज नहीं होने वाला। यानी कि रेजिस्टिविटी कांस्टेंट होता है। तो अभी जो हमने प्रूफ किया प्यारे बच्चों उसको बोलते हैं प्रूफ्स ऑफ़ ओम्स लॉ जिसमें रजिस्टिविटी को कांस्टेंट प्रूफ करना होता है या डेरिवेशन ऑफ रेजिस्टिविटी बोल सकते हो। डेरिवेशन या एक्सप्रेशन कुछ भी बोल सकते हैं। कई लोग डेरिवेशन को एक्सप्रेशन लिखते हैं। क्या लिखते हैं भैया कि इसका एक्सप्रेशन आपको ड्राइव करना है। एक्सप्रेशन मतलब फार्मूला ड्राइव करना है। अब देखो इसके डेरिवेशन का एक पर्टिकुलर तरीका है। फॉर्मेट है। अगर इस तरीके को फॉलो नहीं करोगे तो उलझ जाओगे। किताबों में पांच-पज में डेरिवेशंस हैं। याद रखना। अब प्यारे बच्चों तो हमने क्या सीखा वो बात बहुत जरूरी है। हमने सीखा कि रजिस्टिविटी का फार्मूला जो है जो भी हमने सीखा उसका डिस्कशन बहुत जरूरी है बेटा। हमने ये सीखा कि जो हमारा रजिस्टिविटी अरे यार क्यों नहीं हो पा रहा है ये ये बड़ा क्यों नहीं हो पा रहा है

29:54 रेजिस्टिविटी का फार्मूला है बेटा मास ऑफ इलेक्ट्रॉन नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन e का स्क्वायर अपॉन में टाऊ अब बेटा हम पढ़ेंगे टेंपरेचर डिपेंडेंस अभी हम स्टार्ट करने जा रहे हैं टेंपरेचर डिपेंडेंस है ना टेंपरेचर डिपेंडेंस है ना ऑफ रेजिस्टिविटी रेजिस्टेंस करंट इन तीनों का हम टेंपरेचर डिपेंडेंस पढ़ेंगे। अब टेंपरेचर डिपेंडेंस कैसे पढ़ेंगे? तो बेटा हमारे सिलेबस में फिलहाल हमारे सिलेबस में फिलहाल हमें जो डिस्कस करना है मैं उसकी बातें कर रहा हूं। हमारे सिलेबस में फिलहाल हमें डिस्कस करना है कंडक्टर को लेके। ठीक है? कंडक्टर को लेके कई लोग बोलेंगे सर हमें तो सेमीकंडक्टर भी पढ़ाया है। बेटा उसका चैप्टर ही अलग है। वो अलग से लास्ट चैप्टर है 14 पर चलो फिर भी मैं बात कर लूंगा। कंडक्टर की बात भी कर लूंगा। सेमीकंडक्टर की बातें भी कर लूंगा। सेमीकंडक्टर और इंसुलेटर पे तो कोई फर्क नहीं पड़ता बेटा। इंसुलेटर की तो हम बात नहीं करेंगे। इस पे

30:40 कोई फर्क नहीं पड़ता है। ठीक है? इंसुलेटर में क्या है? अगर इंसुलेटर को आप टेंपरेचर तो जल जाएगा ये। अगर लकड़ी को हम टेंपरेचर देंगे लकड़ी जल जाएगा। प्लास्टिक को टेंपरेचर देंगे प्लास्टिक जल जाएगा। तो इंसुलेटर की बातें हम नहीं करते। फिलहाल मैं कंडक्टर की बातें करने जा रहा हूं। ध्यान देना। तो बेटा कंडक्टर के अंदर जब हम टेंपरेचर को बढ़ाएंगे प्लीज जब हम टेंपरेचर को बढ़ाएंगे ना तो हमारा ये जो वाला पार्ट है ये वाला हिस्सा ये वाला जो हिस्सा है प्लीज ध्यान दीजिएगा। प्लीज ये वाला जो हिस्सा है इसको बोलते हैं पता है क्या? कोलीजन टाइम रिलैक्सेशन टाइम। इट इज द टाइम बिटवीन टू सक्सेसिव कोजन। तो बेटा देखो अब सोचो पहले ये मेरे दो हाथ 4 सेकंड में कोलाइड हो रहे थे। 4 सेकंड में। अब मैं टेंपरेचर बढ़ा दूंगा तो पार्टिकल जल्दी-जल्दी कोलाइड होंगे। समझ पा रहे हो? तो टेंपरेचर बढ़ाने से जल्दी-जल्दी कोलाइड होंगे। मेरी बात को समझना। कुल मिला के मैं आपको समझाने का एक सिंपल एग्जांपल भी ले सकते हैं। थोड़ा अच्छा एग्जांपल है कि

31:25 देखो पहले जो पार्टिकल्स थे कोलाइड कर रहे थे 4 सेकंड में। अब पार्टिकल कोलाइड करेंगे जल्दी-जल्दी फास्ट। अब 1 सेकंड के अंदर ही कोलाइड करेंगे। तो ये टाइम जो है टाइम कोलीजन घट जाता है। और टाइम घटने की वजह से रेजिस्टिविटी बढ़ जाता है। तो हमने क्या सीखा बेटा? कि कंडक्टर के अंदर टेंपरेचर बढ़ने से एवरेज टाइम जो एवरेज टाइम एवरेज टाइम बिटवीन कोलीजन है वो घट जाएगा और रेजिस्टिविटी बढ़ जाएगा। और याद रखना बेटा रेजिस्टिविटी बढ़ने से रेजिस्टेंस भी बढ़ेगा और रेजिस्टेंस बढ़ने से करंट घट जाएगा। तो कंडक्टर के अंदर टेंपरेचर बढ़ाने से करंट घट जाता है। कंडक्टर के अंदर टेंपरेचर बढ़ाने से करंट हमारा घट जाता है। अब प्यारे बच्चों यहां पर कुछ बातें हैं जो आपको बहुत ही ज्यादा गहराई से समझनी है कि टेंपरेचर बढ़ने से टाइम घटा। टाइम घटने से रेजिस्टिविटी बढ़ा, रेजिस्टेंस बढ़ा, करंट घटा। और करंट घटने का मतलब है कि आपकी ड्रिफ्ट वेलोसिटी भी घट गई। आप ये भी लिख सकते हो कि भैया

32:11 हमारी ड्रिफ्ट वेलोसिटी जो है ड्रिफ्ट वेलोसिटी वो भी घट जाएगा। करंट घटने का यही तो मतलब है कि आपके ड्रिफ्ट वेलोसिटी पर भी फर्क पड़ेगा। बात समझ पा रहे हो? क्या वेलोसिटी पे भी फर्क पड़ रहा है। तो ये कंडक्टर की बातें हैं। ये बात आपको ध्यान रखनी है। अच्छा एक बार अगर हम कॉपर के लिए ग्राफ बना लें रेजिस्टिविटी और टाइम। कंडक्टर के लिए ग्राफ बना ले रेजिस्टिविटी और टेंपरेचर के साथ। तो ग्राफ ऐसा आता है बेटा कि समय के साथ इसकी रेजिस्टिविटी बढ़ती है। रेजिस्टिविटी बढ़ रही है बेटा। अगर हम बात करें सेमीकंडक्टर की बात करें तो सेमीकंडक्टर में पीछे क्या कांसेप्ट होता है? जब आप टेंपरेचर को बढ़ाते हो बेटा जब आप टेंपरेचर को बढ़ाते हो ना तो सेमीकंडक्टर में क्या होता है? इसको मैं आपको बता दूं। देखिएगा ध्यान से इसे हटा देते हैं। सेमीकंडक्टर में क्या होता है प्यारे बच्चों? कि यहां पर ना n की वैल्यू बढ़ जाती है बहुत ज्यादा। n की वैल्यू और n की वैल्यू बढ़ जाने से रेजिस्टिविटी घट जाता है। क्योंकि सेमीकंडक्टर के अंदर नए

32:56 इलेक्ट्रॉन्स पैदा होने नए इलेक्ट्रॉन्स स्टार्ट हो जाते हैं बहना। जो अच्छे से आप चैप्टर में पढ़ोगे जब सेमीकंडक्टर पढ़ोगे। फिलहाल मैं आपकी इतनी हेल्प कर सकता हूं कि बता सकता हूं। नए नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स आने स्टार्ट हो जाएंगे क्योंकि वो सेमीकंडक्टर है। उसके अंदर सारे इलेक्ट्रॉन पहले नहीं थे। अब इलेक्ट्रॉन्स आने स्टार्ट हो जाएंगे टेंपरेचर की वजह से। इलेक्ट्रॉन्स फ्री हो जाएंगे फ्री। तो इसमें क्या है? टेंपरेचर जब बढ़ता है ना बेटा तो n बढ़ जाता है। और बेटा जब n बढ़ जाएगा ना नीचे का बढ़ेगा तो ऊपर का घटेगा बेटा। तो इसकी रेजिस्टिविटी घट जाती है। और रेजिस्टिविटी घटेगी तो ऑब्वियसली करंट बढ़ जाएगा बेटा। तो करंट यहां पर बढ़ जाता है। अगर इसके लिए अगर हम ग्राफ की बात करें रेजिस्टिविटी वर्सेस टेंपरेचर तो इसका ग्राफ कुछ ऐसा आएगा कि रेजिस्टिविटी घटेगी टेंपरेचर के साथ। रेजिस्टिविटी घटेगी टेंपरेचर के साथ प्यारे बच्चों। तो ये कुछ हमने पढ़ा। अब थोड़ा सा हम अलॉयस के बारे में भी बात कर लेते हैं। थोड़ा सा थोड़ा सा हम अलॉयस के बारे में बात कर लेते हैं। अलॉयस। देखो बेटा अलॉयस क्या होता है? मिक्सचर ऑफ मेटल। मिक्सचर ऑफ

33:43 मेटल। तो जब हम अलॉयस के बारे में पढ़ना हमने स्टार्ट किया तो हमें पता लगा कि रेजिस्टिविटी वर्सेस टेंपरेचर के ग्राफ की बात करें तो इसके ग्राफ पर इतना ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। इसका ग्राफ ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट मतलब कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। अलॉयस में होता है लेस टेंपरेचर डिपेंडेंस। लेस टेंपरेचर डिपेंडेंस डिपेंडेंस ऑन रेजिस्टिविटी ऑन रेजिस्टिविटी रेजिस्टिविटी पर टेंपरेचर से इतना फर्क नहीं पड़ता है अलॉयज़ में इसीलिए अलॉयस का इस्तेमाल किया जाता है बहुत जगह पे क्योंकि टेंपरेचर से उस पे इतना फर्क नहीं पड़ेगा तो आई होप आप समझ गए होंगे कि हमारा खेल क्या चल रहा है। कंडक्टर के अंदर टाइम वाला फैक्टर है। याद रखना कंडक्टर के अंदर टाइम वाला फैक्टर है कि टाइम घट गया। अब जल्दी-जल्दी कोलाइड हो रहे हैं। सेमीकंडक्टर के अंदर n वाला फैक्टर है कि n बढ़ जाता है और इंसुलेटर पे कोई इतना खास फर्क है नहीं और अलॉयस पर भी कोई खास

34:29 फर्क नहीं पड़ता है। टेंपरेचर से रेजिस्टिविटी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। सो प्यारे बच्चों अब कई बार ऐसा होगा कि आपसे बोलेंगे देखो जब हमारा टेंपरेचर 10° सेल्सियस है। तो हमारा रेजिस्टेंस है जो R1 है जब टेंपरेचर T1 है 10° रेजिस्टेंस है मान लो 5 ओम। बोलेंगे भैया हमने टेंपरेचर को कर दिया 20° सेल्सियस। तो रेजिस्टेंस कितना होगा? यानी कि टेंपरेचर बढ़ाने से रेजिस्टेंस भी चेंज होगा। तो बेटा उसके लिए फार्मूला है सेम रेजिस्टेंस के लिए, सेम रेजिस्टिविटी के लिए। देखिए, R2 मतलब फाइनल रेजिस्टेंस = इनिशियल ब्रैकेट 1 + अल्फा चेंज इन टेंपरेचर। अब अल्फा क्या होता है? अल्फा इज़ टेंपरेचर कोफिशिएंट ऑफ़ रेजिस्टेंस। टेंपरेचर कोफिशिएंट ऑफ़ रेजिस्टेंस। ठीक है? कोफिशिएंट ऑफ़ रेजिस्टेंस भी बोलते हैं इसको। कोफिशिएंट ऑफ़ रेजिस्टेंस। तो ये बेटा अल्फा होता है। सेम एक क्वेश्चन करवाऊंगा। रेजिस्टिविटी के लिए क्या होगा? रो2 = रो1 पहला वाला 1 + अल्फा चेंज इन

35:16 टेंपरेचर। चलो एक क्वेश्चन करके दिखाता हूं। मान लो इस क्वेश्चन के लिए जो अल्फा है कोफिशिएंट है वह वैल्यू दे रखी है टू और मुझे इस क्वेश्चन में r2 निकालना है। तो r2 = r1 इनिशियल वैल्यू कितनी है? 5 5 1 + अल्फा। अल्फा की वैल्यू टू है। ये रहा टू चेंज इन टेंपरेचर। डेल्टा T का मतलब है चेंज इन टेंपरेचर। तो 10° से 20° में चेंज कितने का आया? चेंज। चेंज आया 10 का। कितना बढ़ा? 10। तो डेल्टा T की जगह आप 10 लिख दोगे। इस क्वेश्चन को सॉल्व करोगे। आंसर आपकी जेब में सेम रेजिस्टिविटी के लिए भी सॉल्व करना है। मोबिलिटी देखिए मोबिलिटी क्या होता है? जैसे कि अगर हमारे पास एक वायर है। सपोज़ करो ये वायर है। तो इस वायर में जब हम पोटेंशियल डिफरेंस लगाते हैं तो अंदर इलेक्ट्रिक फील्ड पैदा होता है। है ना? और इलेक्ट्रिक फील्ड की वजह से इलेक्ट्रिक फील्ड की वजह से ये प्लस माइनस लगाया

36:01 हमने। पोटेंशियल डिफरेंस। तो हम कहते हैं इधर का हिस्सा प्लस हो जाएगा। इधर का हिस्सा माइनस। तो प्लस से माइनस की तरफ इलेक्ट्रिक फील्ड होता है। तो इलेक्ट्रिक फील्ड के अपोजिट डायरेक्शन में इलेक्ट्रॉन का मोशन होता है। मोशन इलेक्ट्रॉन का मोशन होता है। क्यों? क्योंकि जो प्लस वाला है इस इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ खींचता है। तो इलेक्ट्रिक फील्ड लगाने से मोशन पैदा होता है। तो मोबिलिटी का मतलब ही होता है एक प्रकार से मूवमेंट। इसका मतलब ही मूवमेंट होता है। तो मोबिलिटी क्या होता है बेटा? कितना ड्रिफ्ट वेलोसिटी पैदा हो रहा है। ड्रिफ्ट वेलोसिटी इसको ड्रिफ्ट मिलता है ड्रिफ्ट। ड्रिफ्ट वेलोसिटी डेवलप्ड पर यूनिट अप्लाइड इलेक्ट्रिक फील्ड। इसी को मोबिलिटी बोलते हैं। तो मोबिलिटी का सिंबल होता है μ और ये होता है ड्रिफ्ट वेलोसिटी डेवलप्ड पर यूनिट इलेक्ट्रिक फील्ड। तो ड्रिफ्ट वेलोसिटी डेवलप्ड पर यूनिट इलेक्ट्रिक फील्ड अप्लाइड इज मोबिलिटी। तो ये बात आपको याद रखनी है। बड़ा सिंपल सा टॉपिक है। कोई बड़ी बात नहीं है। हम इसके ऊपर क्वेश्चनंस भी करेंगे अभी थ्योरीज पढ़ने के बाद। सो सिंपल सा टॉपिक है। सबको आता है बचपन से। रेजिस्टेंस इन सीरीज़ इन पैरेलल। लेकिन जब हम फ्यूचर में क्वेश्चन करेंगे तो आपको कुछ बातें पता होना चाहिए।

36:47 सीरीज में क्या होता है कि हम लोग ऐसे रेजिस्टेंस को लगाते हैं सीरीज में। रेजिस्टेंस मतलब रुकावट R1, R2, R3 जिसको हम सीरीज़ में लगाते हैं ना, तो इन सबकी जगह टोटल क्या होगा? इन सबका इक्वल इन सबकी जगह इक्विवेलेंट क्या होगा? तो इसको पढ़ाने की जरूरत भी नहीं या बचपन से जानते हो जो R नेट है वो सिंपल R1 + R2 + R3 R4 चलता है। सिंपल एडिशन होता है। या फिर इसको R इक्विवेलेंट भी बोलते हैं। R इक्विवेलेंट जो कि है R1 + R2 + समथिंग। कई बार ऐसा होता है कि ये सब चीज़ एग्जाम में पूछी भी नहीं जाती क्योंकि ये बड़ा आसान है। अगर हम पैरेलल की बात करें तो पैरेलल में क्या होगा प्यारे बच्चों? सबको पता है। ये सब छोटी-छोटी बातें होती है। पैरेलल में एक ऊपर होगा तो दूसरा उसके नीचे तीसरा उसके नीचे। तो ये बातें पता होती है। तो मान लो यह R1 है। ये R2 है। यह R3 है। तो आपसे कोई बोले टोटल निकालो। तो पैरेलल में ऐसे निकालते हैं। 1 / r नेट = 1 / r1 + 1 / r2 ऐसे चलता रहता है बेटा। अब यहां पर सर आप पढ़ा क्यों रहे हो? हमें

37:33 पहले से पता है। यहां पर क्या बातें आपको याद रखनी है बेटा कि जब कोई सीरीज में होता है सीरीज में एक के बाद एक के बाद एक तो सीरीज में क्या याद रखना है बेटा कि करंट जो है करंट वो सेम रहेगा। यहां पर करंट की वैल्यू हमेशा सेम रहेगी। R1, R2, R3 में करंट की वैल्यू सेम होगी। यहां पर याद रखना बेटा करंट की वैल्यू अलग-अलग हो सकती है। इन तीनों आर्म में तीनों के अंदर करंट डिफरेंट होगा और यहां लेकिन वोल्टेज सेम होगा। दो चीजें होती है बेटा। एक करंट और एक वोल्टेज। यहां करंट सेम है। वोल्टेज मे बी डिफरेंट। इसकी वैल्यू चेंज हो सकती है। मे बी डिफरेंट है ना? मे बी डिफरेंट। इसकी वैल्यू चेंज हो सकती है। मे बी डिफरेंट। याद रखना डिफरेंट। इसमें क्या है? वोल्टेज तो हमेशा सेम रहेगा। इसमें करंट मे बी डिफरेंट। इसमें करंट की वैल्यू आपको डिफरेंट नजर आ सकती है। मे बी डिफरेंट। तो ये बात आपको याद रखनी है कि सीरीज में हमारा करंट सेम और वोल्टेज में हमारा ओ सॉरी पैरेलल में हमारा वोल्टेज सेम होता है। सो अब हमारे पास काफी इंपॉर्टेंट टॉपिक है ईएमएफ एंड पोटेंशियल

38:19 डिफरेंस। तो एक बार ईएमएफ को समझ लेते हैं। तो ईएमएफ से पहले मैं आपको बता दूं एक सेल के बारे में हल्का सा समझो। अगर हमारे पास एक सेल है तो सेल को हमने 10th क्लास में ऐसे बनाया था। लेकिन आज के टाइम पर ना कहा जाता है कि सेल का भी कुछ ना कुछ रेजिस्टेंस होगा। ये सेल है। जब इस सेल को हम बनाएंगे तो इसका कुछ ना कुछ अपना रेजिस्टेंस होगा। तो एक छोटा सा यहां पर रेजिस्टेंस बनाया जाता है। इसको बोलते हैं इंटरनल रेजिस्टेंस। स्मॉल r का मतलब होता है इंटरनल रेजिस्टेंस। तो बेटा सेल में ना सेल में रुकावट भी होता है। तो हम एक सेल को ऐसे बनाते हैं कि देखो सेल की जो ईएम अब देखो सेल के पास बोलते हैं इसके पास ईएमएफ है। ईएमएफ तो ईएमएफ e है। देखो हम ईएमएफ की बात कर रहे हैं। ईएमएफ ईएमएफ तो एक सेल का ईएमएफ e है और इंटरनल रेजिस्टेंस R है। तो हमें इसी ईएमएफ को समझना है। ये ईएमएफ क्या होता है? देखो ईएमएफ को समझना बड़ा आसान है कि अगर हमारे पास कोई सर्किट है। सपोज़ करो ये सर्किट है। तो ईएमएफ का ये मतलब होता है जैसे इस सेल के ईएमएफ की बात करें तो ईएमएफ का

39:05 मतलब समझना। इट इज़ द अमाउंट ऑफ़ वर्क डन। यह वर्क डन होता है। वर्क डन इन ब्रिंगिंग यूनिट पॉजिटिव चार्ज वंस अराउंड द कंप्लीट सर्किट। सर समझ नहीं आया। कह रहा है कि मान लो कि यह हमारा एक यूनिट पॉजिटिव चार्ज है। यूनिट पॉजिटिव चार्ज का मतलब हो गया फॉर एग्जांपल वन कूलम। यूनिट यूनिट मतलब वन पॉजिटिव मतलब प्लस का 1 कूलम। तो यूनिट पॉजिटिव चार्ज को अगर हम यहां से उठा के वंस अराउंड द कंप्लीट सर्किट। पूरे में घुमा दें तो कितना वर्क डन करना पड़ेगा? तो ईएमएफ का मतलब होता है इट इज़ द अमाउंट ऑफ़ वर्क डन। कि ईएमएफ कुछ भी नहीं है। ये है वर्क डन इन ब्रिंगिंग यूनिट पॉजिटिव चार्ज। ये वर्क डन है एक यूनिट पॉजिटिव चार्ज को ब्रिंग करने में, घुमाने में वंस अराउंड द कंप्लीट सर्किट। तो भैया कुछ नहीं है। ईएमएफ एक प्रकार से वर्क डन होता है। ईएमएफ का मतलब हो गया वर्क डन पर यूनिट चार्ज। ईएमएफ का मतलब होता है वर्क डन पर यूनिट चार्ज। कि कितना वर्क डन करना पड़ रहा है पर यूनिट चार्ज को घुमाने के लिए। वंस अराउंड द कंप्लीट सर्किट। अच्छा जी। तो सर ये पोटेंशियल डिफरेंस क्या होता है? समझाओ। तो पोटेंशियल डिफरेंस का मतलब

39:51 होता है कि मान लो हमारे पास एक सर्किट है। और इस सर्किट में यहां पर कोई चीज लगा हुआ है a। कोई a नाम का डिवाइस लगा हुआ है। सपोज़ करो। तो पोटेंशियल डिफरेंस का मतलब होता है कि एक मान लो एक पॉइंट है ये x और एक पॉइंट है y. तो x से y तक में कितना वर्क डन करना पड़ेगा? तो इट इज द अमाउंट ऑफ वर्क डन ब्रिंगिंग अ यूनिट पॉजिटिव चार्ज वन पॉइंट टू अनदर। यानी पोटेंशियल डिफरेंस भी वर्क डन पर यूनिट चार्ज है। पोटेंशियल डिफरेंस भी पोटेंशियल डिफरेंस भी वर्क डन पर यूनिट चार्ज है। लेकिन ये एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट तक लिखा है ना वन पॉइंट वन पॉइंट टू अनदर पॉइंट। उसमें क्या है? वर्क डन पर यूनिट चार्ज वंस अराउंड द कंप्लीट। और ये है वर्क डन पर यूनिट चार्ज वन पॉइंट से अनदर पॉइंट का। आप नोट करो फिर हम आगे बढ़ते हैं। अब एक सेल का सिंपल सेटअप याद रखो काम आएगा कि एक सेल के अंदर लोड होता है। लोड जैसे मान लो हमने यहां बल्ब लगा दिया बल्ब। तो बल्ब को हम लोड कहेंगे और उसके रेजिस्टेंस को हम कहेंगे R. R का मतलब एक्सटर्नल

40:36 रेजिस्टेंस। भैया एक सेल के अंदर एक रेजिस्टेंस लगाया गया है। बल्ब लगाया गया है। लोड लगाया गया है क्योंकि जो बल्ब लगाएंगे उसमें रेजिस्टेंस तो होगा ही होगा। और स्मॉल R का मतलब है सेल का इंटरनल रेजिस्टेंस। उसके पास भी एक रेजिस्टेंस है। अब ये बेटा ईएमएफ है E. तो देखो यहां पर एक रिलेशन हम पढ़ेंगे कि जो पोटेंशियल डिफरेंस होगा वो E - IR होगा। अगर इस सर्किट के अंदर करंट I है तो जो पोटेंशियल डिफरेंस होगा, पोटेंशियल डिफरेंस कहां होगा? यह x है और यह y है। तो x और y के बीच में होगा पोटेंशियल डिफरेंस। तो जो पोटेंशियल डिफरेंस होगा v वो होगा e - IR के बराबर। जहां पर e का मतलब ईएमएफ है। I का मतलब करंट है। R का मतलब रेजिस्टेंस है स्मॉल। तो बेटा ये एक रिलेशन आपको याद रखना है। अच्छा ये रिलेशन है डिस्चार्ज का। डिस्चार्ज का मतलब क्या है? अगर आपने एक सेल लगाया है जो डिस्चार्ज हो रहा है। अगर हम चार्जिंग करेंगे चार्जिंग। अगर हम सेल को चार्जिंग करेंगे तो V = E + IR का रूप ले लेगा। और

41:22 अगर हम कहें कि हम कुछ भी नहीं कर रहे। ना हम डिस्चार्ज कर रहे हैं ना चार्ज कर रहे हैं। हम कह रहे हैं सर्किट में करंट की वैल्यू जीरो है। ना करंट आ रही है ना करंट जा रही है। तब उस टाइम पर क्या होगा? V की वैल्यू E के बराबर हो जाएगा। कैसे? जब करंट ज़ीरो हो जाएगा, तो V = E हो जाएगा बेटा। अगर करंट को जीरो कर दोगे तो V = E हो जाएगा। तो ये तीन केस आपको सेल के बारे में याद रखना है जो इंपॉर्टेंट है। फिर हम आगे बढ़ेंगे फटाफट। सो अब देखो सेल्स का जो सीरीज एंड पैरेलल कनेक्शन हम करेंगे। सेल्स इन सीरीज़ नहीं दोनों पढ़ रहे हैं हम। ठीक है ना? सेल्स कनेक्शन। सेल्स का हम कनेक्शन करते हैं। क्यों? क्योंकि जो सेल है उसकी वोल्टेज बहुत कम होती है। तो सेल्स को हमने सीरीज और पैरेलल में जोड़ दिया ताकि वोल्टेज को हम बढ़ा घटा सके अपने हिसाब से। तो अभी देखो सीरीज में जब कनेक्ट करते हैं ना तो बेटा एक सेल यहां तक होता है। ये एक सेल है। इसको मैं ब्रैकेट लगा रहा हूं। ये दूसरा सेल है बेटा। और ये तीसरा सेल यहां से तो E1 R1 पहला सेल E2, R2 दूसरा सेल, E3, R3 तीसरा

42:08 सेल। तो इनको सीरीज़ में हमने कनेक्ट किया है। तो सीरीज़ में जब टोटल ईएमएफ आएगा नेट ईएमएफ वो सिंपल एडिशन से आता है E1 + E2 + E3 और रेजिस्टेंस कैसे आएगा? R1 + R2 + R3 तो सीरीज़ में पंगा नहीं है। पैरेलल में है मेन पंगा। पैरेलल में क्या होता है? एक सेल ऊपर है। आपको दिख रहा होगा। यह एक सेल, उसके नीचे ये दूसरा सेल और उसके नीचे ये तीसरा सेल। तो 1, 2, 3 तीनों पैरेलल में हैं। अगर तीनों पैरेलल में है, तो यहां पे हम रेजिस्टेंस कैसे निकालेंगे? 1 / R नेट। पैरेलल में तो 1 / R नेट ही होता है। तो 1 / R1,1 / R2 तो रेजिस्टेंस निकालना आसान है। इसमें कोई दिक्कत नहीं है। मेन खेल फंस जाते हैं नेट ईएमएफ में। जब पैरेलल में E1, E2, E3 दिया हो तो नेट ईएमएफ निकालने के लिए आप पुश नहीं करते। आप बोलते हैं E1 / R1 E2 / R2 E3 / R3 E1 / R1 E2 / R2 E3 / R3 बहुत सिंपल कि E1 R1 E2 R2 E3 R3 लेकिन सब कुछ सॉल्व करने के बाद आपको यहां पर मल्टीप्लाई करना होता है R नेट से यानी जो आप R नेट यहां से सॉल्व करोगे यहां से जो आंसर निकालोगे आपको यहां

42:54 पर मल्टीप्लाई करना पड़ेगा तो E1 R1 E2 R2 E3 R3 इंटू में R नेट तब जाके आपको मिलेगा E नेट। तो ये यहां पर एक खास बात होती है जो आपको समझना है। तो हमने सेल सेल सीरीज एंड पैरेलल में इसको खत्म किया। अब देखो इंपॉर्टेंट टॉपिक है। यहां प्रॉपर हमने डेरिवेशन किया हुआ है। ठीक है? दो डेरिवेशन हमने किया हुआ है। पहला क्या? अगर हमारे पास बहुत सारे सेल्स हैं n सेल्स सीरीज के अंदर लेकिन इस बार सबकी ईएमएफ e है रेजिस्टेंस r है इंटरनल रेजिस्टेंस इंटरनल तो जैसे ये एक सेल है तो इस सेल का ईएमएफ e है रेजिस्टेंस है r ये दूसरा सेल e एंड आर ये तीसरा सेल इसका भी e आर फिर यहां चौथा पांचवा छठा ऐसे बहुत सारे सेल है और जब इन सभी सेल को मिला के एक बैटरी बन गया तो उस बैटरी को हमने लोड से कनेक्ट कर दिया लोड लोड मतलब मान लो किसी बल्ब्स में किसी कार के अंदर कहीं भी उन बैटरीज को कनेक्ट कर दिया अब प्यारे बच्चों हमें ये सीखना है कि अगर बहुत सारे स्मॉल आर हैं छोटे-छोटे आर टोटल R नेट कितना होगा? तो हम बोलेंगे देखो R

43:41 सीरीज है सीरीज R + R + R+ कितनी बार? N बार हमारे पास N सेल्स हैं तो NR बन जाएगा। और ईएमएफ क्या है? E + E + E + E + Ne बन जाएगा। तो नेट रेजिस्टेंस छोटा वाला और ईएमएफ हमने निकाल लिया। अब ओम्स लॉ का याद करोगे ना तो ओम्स लॉ कहता है कि करंट हमेशा होता है टोटल वोल्टेज अपॉन में टोटल रेजिस्टेंस। टोटल वोल्टेज अपॉन में रेजिस्टेंस या टोटल कह सकते हो टोटल। तो यहां पर टोटल ईएमएफ है कितना? N के बराबर टोटल ईएमएफ इतना है। टोटल ईएमएफ अपॉन में रेजिस्टेंस। तो रेजिस्टेंस क्या है? एक तो एनआर है स्मॉल वाले ये जो स्मॉल वाले एनआर लेकिन एक लोड भी तो हमने लगा रखा है लोड तो एनर हो गया सभी छोटे वाले को मिला के और एक कैपिटल R तो ये करंट का डेरिवेशन होता है बड़ा ईजी डेरिवेशन होता है ये एग्जाम में बहुत कम चांस होता है आने का तो यहां पर लिखेंगे फॉर मैक्सिमम करंट अगर हमें मैक्सिमम करंट चाहिए तो ध्यान रखना खास बात क्या है यहां पर R की वैल्यू को हाई लिया जाता है अगर हम जो लोड लेंगे लोड इसकी वैल्यू हाई लेंगे तो सर्किट में करंट

44:26 मैक्सिमम हो जाता है। ये कांसेप्ट आपको याद रखना है और ये करंट का फार्मूला आपको याद रखना है। अब प्यारे बच्चों बात करते हैं n सेल्स इन पैरेलल। अगर हमारे पास सेल्स जो है वो पैरेलल में है तो क्या होगा? अगर हमारे पास n सेल्स हैं और वो n सेल्स बेटा पैरेलल में है। ध्यान देना n सेल्स इन पैरेलल ईच ईएमएफ e रेजिस्टेंस आर तो पैरेलल में अगर हम नेट रेजिस्टेंस निकालेंगे r r r तो 1 / r = 1 / r 1 / r 1 / r 1 / r n टाइम्स तो n / r आएगा और इसी को उल्टा करेंगे तो नेट रेजिस्टेंस आएगा बेटा r / n क्योंकि हमें उल्टा भी करना पड़ेगा ये 1 / r नेट है हम उल्टा करेंगे इसको r नेट करेंगे तो r / n आ जाएगा हमारा आंसर। ठीक है? तो हमें नेट ये तो मिल गया। छोटे वाले तो हमने सॉल्व कर लिए। अब बड़े वाले की बात करते हैं। तो पैरेलल में बेटा सबका ईएमएफ सेम है। तो हम बोलेंगे जो हमारा टोटल ईएमएफ आएगा ना वो भी e के बराबर ही रहेगा। याद रखना मैंने बताया था कि पैरेलल में अगर इसका सेम है, इसका सेम है, इसका सेम है तो टोटल भी सेम के बराबर ही आता है। तो पैरेलल में जो टोटल ईएमएफ होगा वो एक के ईएमएफ के बराबर होगा। कितनी खास बात है कि पैरेलल में टोटल ईएमएफ एक के ईएमएफ के बराबर होगा। अब बात करते हैं

45:12 करंट की। तो भैया करंट का तो यही फार्मूला होता है। टोटल ईएमएफ टोटल ईएमएफ तो e के बराबर ही है। पूरा ईएमएफ एक के बराबर है। रेजिस्टेंस क्या होगा? एक तो R है। R कौन? लोड। इससे हम लोड को कनेक्ट करेंगे बेटा। इससे किसी लोड को कनेक्ट किया जाएगा इस बैटरी से। इस सेल से हम बनाएंगे बैटरी। ये बैटरी को एक लोड से कनेक्ट करेंगे। तो टोटल ईएमएफ E है। रेजिस्टेंस R और R / N R एंड R / N। तो देखो करंट का फार्मूला क्या होगा? टोटल ईएमएफ ओम्स लगाओ। V अपॉन में रेजिस्टेंस तो V की जगह पर E लिख देंगे। रेजिस्टेंस हो गया R + R / N अब ये एलसीएम लेंगे तो N ऊपर चला जाएगा NR + R तो ये करंट का फार्मूला है। जैसा कि ये पैरेलल है तो यहां पर R की वैल्यू मस्ट बी लो। यहां पर R की वैल्यू हमें कम रखना पड़ता है। तब जाके हमें मैक्सिमम करंट मिलता है। तो सीरीज़ में कैपिटल R की वैल्यू हाई रखनी होती है और पैरेलल में R की वैल्यू लो रखनी होती है ताकि करंट हमें मैक्सिमम मिले। प्यारे बच्चों इस क्वेश्चन की डेरिवेशन हमारे एनसीईआरटी में नहीं है। ये जो टॉपिक है मैं आपको एक्स्ट्रा करवा रहा हूं। हमारे एनसीईआरटी में इसकी कोई खास बात नहीं की गई है। क्या लिखा हुआ है

45:58 बेटा? लिखा हुआ है मिक्स्ड ग्रुपिंग ऑफ सेल्स। सेल्स का मिक्स्ड ग्रुपिंग। अब तुम्हें बड़ा अजीब लगेगा मिक्स ग्रुप में क्या मतलब? देखो मिक्स ग्रुपिंग का ये मतलब होता है बहुत सारे सेल्स लिए जाते हैं बहुत सारे सेल्स और बहुत सारे स्मॉल r वाले और सेल्स को सीरीज में लाया जाता है ऐसे सीरीज में। तो हम लेते हैं n सेल्स इन सीरीज। यहां खास बात है कि 1 2 3 4 5 6 ऐसे n सेल्स सीरीज में लेते हैं। और जो ऊपर हमने लिया उसको रिपीट करते हैं। 1 2 3 4 5 6 ऐसे करते रहते हैं। तो बोला गया कि n सेल्स हम सीरीज में लेते हैं। और m टाइम्स m टाइम्स रिपीटेड इन पैरेलल रोज़। जैसे ये n है। जैसे मैं एग्जांपल लेता हूं कि मैंने इधर 10 सेल्स लगा दिए। 10 सेल्स और इसी 10 को मैं रिपीट करूंगा। 1 2 3 4 तो 10 हो गया। हमारा n की वैल्यू 10 हो गई। और m की वैल्यू हमारी फोर हो गई। क्यों? हमने कितनी बार रिपीट किया है? 1 2 3 4 और ये पांचवा हो गया ना? पांच। तो हमने पांच बार रिपीट किया है। हमने 10

46:43 सेल्स को लिया और पांच बार रिपीट किया। 1 2 3 4 5 तो n की वैल्यू 10 हो गई। m की वैल्यू फाइव हो गई। अगर आप 10 * 5 करेंगे तो आपको मिलेगा 50 सेल्स जो कि पूरे सेल्स के बराबर है। देखो 10, 20, 30, 40, 50 यानी जब हम m क्रॉस n करते हैं तो हमें टोटल सेल्स मिल जाते हैं। कितने सेल्स हैं टोटल? तो n सेल्स इन सीरीज m टाइम्स हम इसको पैरेलल में रिपीट करेंगे और टोटल सेल्स का मतलब होगा mस n। अब प्यारे बच्चों करंट की बात की जाती है। तो करंट का तो बहुत सिंपल सिद्धांत होता है कि ये फार्मूला है बेटा करंट का। m * n * e rm + nr. अब मैक्सिमम करंट की बात की जाए तो मैक्सिमम करंट के लिए आपके पास होगा rm * nr. RM = nr के बराबर। मैक्सिमम करंट की कंडीशन होती है। अब यहां पर R का मतलब होता है लोड कि भैया ये जो तुमने बैटरी बनाया है इस बैटरी को किसी लोड से कनेक्ट तो करोगे तो आर का मतलब एक्सटर्नल रेजिस्टेंस या फिर लोड होता है। तो ये छोटे-छोटे टॉपिक आप याद रखो आपके बहुत काम आएगा। हिरण कशप भक्ष

47:30 सिला टंका नखाला यतो नरसिं परितो नरसिं यतो यतो याम ततो नरसिं हो गया अब देखो हम पढ़ेंगे किच लॉ इनफिनिटी स्टोन ब्रिज है ना प्यारे बच्चों जो भी हमने खिचो लॉ पढ़ा है उससे हमें वीट स्टोन ब्रिज को समझने के लिए एग्जाम में कई बार क्वेश्चन आता है। तो ये वीट स्टोन ब्रिज क्या होता है पहले वो समझो। कहते हैं कि चार रेजिस्टेंस

48:16 होंगे। एक दो कॉर्नर्स में चार रेजिस्टेंस होंगे ऐसे और बीच में एक रेजिस्टेंस होगा जिसको बोलते हैं जी। बेटा जी का मतलब होता है गैल्वेमीटर। ये एक करंट नापने की मशीन होती है। जी। इसको गैल्वेनोमीटर बोलते हैं। बता रहा हूं मैं। जी का मतलब है एक रेजिस्टेंस बेटा रेजिस्टेंस। ये एक डिवाइस होता है डिवाइस करंट के लिए। एक डिवाइस होता है करंट को नापने के लिए जो आप अगले चैप्टर में पढ़ोगे। मूविंग कोइल गैल्वेमीटर। तो ये मेरे पास एक डिवाइस है जी। और बगल में रेजिस्टेंस है P Q R S तो और यहां पर हम लगाते हैं बैटरी। सोर्स लगाते हैं सोर्स। तो इसको बोलते हैं हम वीट स्टोन ब्रिज। इसको बोलते हैं बेटा वीट स्टोन ब्रिज। लेकिन ध्यान रखना जब G के अंदर करंट की वैल्यू जीरो हो जाए। यानी जब बीच वाले के अंदर कोई भी करंट नहीं होता है। नो करंट। G के अंदर कभी भी नो करंट हो जाए। नो करंट। तो यहां एक बहुत ही

49:02 प्यारी घटना घटती है। जब G के अंदर कोई करंट नहीं होता है तो एक रेशियो P / Q और R / S का बराबर हो जाता है। यानी यहां का रेजिस्टेंस अपॉन में यहां का रेजिस्टेंस यहां का रेजिस्टेंस अपॉन में यहां का रेजिस्टेंस आपस में इक्वल हो जाते हैं। तो इसको बोलते हैं बैलेंस्ड बैलेंस वीट स्टोन ब्रिज। इसी को प्यारे बच्चों बैलेंस विट स्टोन ब्रिज कहा जाता है। अब प्यारे बच्चों इस बात को हमें प्रूफ करना होता है प्रूफ। यह जो बैलेंस विट स्टोन ब्रिज है बैलेंस विट स्टोन ब्रिज है इसको हमें प्रूफ करना होता है प्रूफ। प्रूफ करना होता है किचॉफ लॉ के हिसाब से। तो किरचॉफ लॉ को हम कैसे अप्लाई करेंगे? उसके लिए कुछ बातें मैं आपको पहले ही क्लियर कर देता हूं। पहली बात ये क्लेरिटी ले लो किचॉफ्स लॉ लगाने के लिए सबसे पहले आपका जो मेन बैटरी होता है सेल। सब सर्विस सेल है जिसका ईएमएफ है e। तो इस सेल से आपको करंट निकालना पड़ता है। करंट और करंट निकाल के यहां पर करंट का डिस्ट्रीब्यूशन

49:49 करना पड़ता है। अब तुम बोलोगे खिचोफ रूल तो हम इस्तेमाल करेंगे पर ये करंट का डिस्ट्रीब्यूशन होगा कैसे? बड़ा आसान है। कैसे आसान है समझना। अगर यहां से करंट I है और इस तरफ कुछ हिस्सा चला जाए। सपोज़ करो इस तरफ करंट का कोई हिस्सा चला गया। ये हिस्सा है I1। तो प्यारे बच्चों, इस तरफ जो हिस्सा आएगा वो होगा I - I1 और ये बहुत लॉजिकल है। अगर ये करंट है I फील करना। ये करंट है I में से अगर इधर इधर इधर इधर इधर इधर इधर I1 चला गया तो बचा हुआ I - I1 इधर जाएगा। फिर प्यारे बच्चों आगे जब ये I1 जाएगा तो इस I1 के पास अब दो बातें हैं। इस I1 में से कुछ हिस्सा इधर जाएगा। मान लो इधर जो करंट गया उसको बोल दिया हमने IG। तो प्यारे बच्चों जब ये I1 इधर जाएगा इधर करंट जाएगा IG। तो इधर क्या बचेगा? फील करना। देखो यहां तक तो I1 था। अब I1 में से IG नीचे आ गया। नीचे आ गया IG। IG नीचे आ गया भैया। तो इधर I1 - IG

50:37 बचेगा। क्योंकि यहां तक I1 था। उसमें से भी IG नीचे चला गया तो I1 - IG उसके बाद प्यारे बच्चों यहां पर करंट डिस्ट्रीब्यूशन में क्या समझना है देखो ध्यान से कि ये फील करना ये I - I1 इधर आ रहा है यहां पे और इधर से आ रहा है बेटा IG इधर आ रहा है IG तो ये ये वाला I - I1 वाला और ये IG इसमें मिल जाएंगे क्योंकि ये ऐसे आ रहा है नीचे और ये ऐसे आ रहा है ऐसे तो ये सब इसके अंदर मिल जाएंगे यहां पे। तो यहां पर जो करंट होगा वो होगा I - I1 उसमें IG मिल चुका है प्यारे बच्चों। ये जो IG ऊपर से आ रहा है और ये I -i I1 जा रहा है। ये सब जाके ऐसे मिल जाएंगे। फील करने वाली बातें और कुछ भी नहीं है कि ऊपर से IG आ रहा है। नीचे से I मिल जाएंगे। ठीक है प्यारे बच्चों? तो ये हमारा बेसिक सा एक करंट का डिस्ट्रीब्यूशन रहेगा। इस सर्किट से हमने I निकाला है। ये I घूमता रहेगा। एक बार जब आप करंट का डिस्ट्रीब्यूशन कर लेते हो तो यहां पर हम किचॉफ के लॉ का इस्तेमाल कर सकते हैं। किचॉफ्स का हम जो लॉ इस्तेमाल करेंगे हम यूज़ करेंगे वोल्टेज का लॉ। तो वोल्टेज लॉ

51:23 कहता है कि समिशन। समीशन बेटा ये सम होता है। सम ऑफ ऑल द वोल्टेज इज़ ज़ीरो इन अ लूप। तो यहां पर हम कुछ लूप बनाएंगे बेटा। लूप बनाना बहुत जरूरी है। लूप हम क्या लेंगे? देखो हम नाम लिख रहे हैं A, B, C, D। अब यहां पर मैं कुछ लूप लिखने वाला हूं। उस लूप को समझिएगा। मैं ले रहा हूं इन लूप। इन लूप ले रहा हूं। देखो मैं ए बी डी ए। मैं ए से बी जाऊंगा। बी से डी आऊंगा और डी से ए। तो ए बी डी ए में मुझे चलना है और वोल्टेज को ज़ीरो लिखना है। तो सबसे पहले देखना ध्यान से। मैं जाऊंगा A से B। अगर मैं A से B जाऊंगा यानी मैं यहां से यहां तक जाना चाहता हूं। तो क्या है? यहां पर एक रेजिस्टेंस है P और करंट है I1। ओम्स लॉ कहता है V = I * में रेजिस्टेंस। तो भाई साहब करंट तो I1 है रेजिस्टेंस P है। तो बेटा I1 आएगा हमारे A से B के रास्ते में I1P अब प्यारे बच्चों अब हम पहुंचेंगे B से D की तरफ तो जब हम B से D की तरफ

52:08 पहुंचेंगे तो हमें क्या मिला? हमें मिला G और करंट क्या मिला? IG तो हम बोलेंगे भैया फिर आगे हमें मिलता है G और करंट है IG। यानी कि रेजिस्टेंस और करंट का हम मल्टीप्लाई कर रहे हैं। फिर प्यारे बच्चों हमारा रास्ता होगा D से A। तो प्यारे बच्चों जब हम D से A तो एक बात आपको नोट करना है जब आप D से A की तरफ जा रहे हो तो करंट आपका इस तरफ आ रहा है और करंट है I - I1 और रेजिस्टेंस है Q। तो आप बोलोगे यार मैं तो यहां लिखूंगा I - I1 रेजिस्टेंस है Q। लेकिन एक प्रॉब्लम याद रखना है आपको। वो प्रॉब्लम यह है कि जैसा कि आप देख रहे हो करंट नीचे की तरफ आ रहा है और हम डी से ए ऊपर की तरफ जा रहे हैं। हम जा रहे हैं डी से ए और करंट नीचे आ रहा है तो यहां पर एक माइनस साइन का इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि हम अपोजिट डायरेक्शन में हो गए और इक्वल टू में बेटा ज़ीरो पुट करना है क्योंकि हम A तक पहुंच चुके हैं। तो समेशन ऑफ़ ऑल द वोल्टेज इज़ ज़ीरो। अब यहां पर एक कंडीशन हम लगाएंगे। क्या कंडीशन लगाएंगे? कि देखो अगर बैलेंस करना है। बैलेंस

52:54 कंडीशन क्या है? बैलेंस्ड कंडीशन। देखिए बैलेंस कंडीशन ये है कि IG जी को ज़ीरो होना पड़ेगा। देखो अगर आपको याद हो कि बैलेंस कंडीशन क्या होता है? जब हमारा I की वैल्यू ज़ीरो होता है G के अंदर। IG की वैल्यू ज़ीरो होनी चाहिए। तब जाके हम बोलेंगे भाई G के अंदर कोई करंट नहीं होना चाहिए। तो बोलेंगे हमें IG की वैल्यू जीरो करना पड़ेगा। तब जाके बैलेंस कंडीशन होगा। तो I1P इक्वल टू में आ जाएगा। देखो ये माइनस साइन उधर चला जाएगा I - I1 Q तो बेटा ये बैलेंस कंडीशन की कि I1 P जो है ये माइनस हो जाके प्लस हो जाएगा। i - i1 अब प्यारे बच्चों हमें दूसरा लूप लेना पड़ेगा क्योंकि हमें ये प्रूव करना है। तो इस बार हम दूसरा लूप क्या ले रहे हैं? प्लीज एक बार ध्यान दीजिएगा ध्यान से। हम यहां ले रहे हैं दूसरा लूप। हम ले रहे हैं बेटा लूप इस बार BCDA B CDA तो इस बार हम पहले B से C तक जाएंगे तो हमें मिलेगा I1 - IGR I1 - IG * में R फिर

53:40 बेटा B से C आने के बाद हम जाएंगे C से D तो C से D में हमें क्या मिलेगा समझना कि करंट जो है इस तरफ जा रहा है। करंट तो ऐसे जा रहा है। देखो करंट तो ऐसे ही जा रहा है। तो पहले लिख लेते हैं I - I1G SS लिख लेते हैं एक बार I - I1 + IG पास हो रहा है S से। लेकिन यहां पर एक खास बात क्या है कि हम जा रहे हैं देखो हम जा रहे हैं C से D की तरफ। यानी हम तो C से D की तरफ जा रहे हैं। हम ऐसे जा रहे हैं C से D लेकिन ये करंट क्या जा रहा है? करंट जा रहा है डी से C की तरफ। तो यहां एक माइनस साइन आएगा। फिर फाइनली बेटा जब हम डी पर पहुंच गए तो अब हमें जाना है डी से लेके B तक। क्या बेटा? क्या?

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