0:01 वेलकम टू स्टडी आईक्यू आई एम अमित वरी द किलोर एंड दिस इज द आर्टिकल्स ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन सीरीज जिसके अंदर हम हर रोज एक आर्टिकल ऑफ दी कॉन्स्टिट्यूशन करते हैं टुडे वी आर गोइंग टू डू द आर्टिकल नंबर 19 इफ यू नीड द पीडीएफ और द पीपीटी फॉर दिस सीरीज दोज आर अवेलेबल ऑन दिस egramswaraj.gov.in [संगीत] नाउ आर्टिकल नंबर 19 के बारे में बात करते हैं व्हिच इज बेसिकली द राइट टू फ्रीडम इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन प्रोवाइड्स सर्टेन फ्रीडम्लैंड मस हैं इंडियन सिटीजंस को दोज आर मेंशन इन दी आर्टिकल नंबर 19 अगर हम एक ओवरव्यू की तरह देखें तो टोटल जो छह
0:48 फ्रीडम है वो ये है कि सबसे पहले एक राइट टू फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन है फॉर एग्जांपल ऑल द सिटीजंस हैव अ राइट टू फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन सारे के सारे सिटीजंस को असेंबल करने का अधिकार है पीसेबली एंड विदाउट आर्म्स ऑल द सिटीजंस हैव अ राइट टू फॉर्म एसोसिएशंस या फिर यूनियंस और कोऑपरेटिव सोसाइटीज हर एक जो भारत का नागरिक होता है वो देश के अंदर फ्रीली मूव कर सकता है कहीं पर भी रिजाइंड या सेटल कर सकता है दे कैन आल्सो प्रैक्टिस एनी प्रोफेशन और एनी ऑक्यूपेशन ट्रेड और बिजनेस अभी हम प्रेजेंटली देखें तो हमारे कॉन्स्टिट्यूशन के अंदर टोटल छह राइट्स हैं आर्टिकल नंबर 19 के अंदर बट व्हेन द कॉन्स्टिट्यूशन वाज क्रिएटेडटेड गिवन पॉइंट ऑफ टाइम इसके अंदर टोटल सेवन राइट्स हुआ करते थे एक राइट था राइट टू एक्वायर होल्ड एंड द डिस्पोज ऑफ प्रॉपर्टी बट दिस राइट ऑफ प्रॉपर्टी वाज
1:34 बेसिकली डिलीटेड बाय द 44th अमेंडमेंट इन आर्टिकल अ इन 44th अमेंडमेंट इन 1978 सो प्रेजेंटली हमें टोटल सिर्फ छह राइट्स करने पड़ते हैं नाउ दीज सिक्स राइट्स आर प्रोटेक्टेड अगेंस्ट स्टेट एंड नॉट अगेंस्ट द प्राइवेट इंडिविजुअल्स अगर हम कोई भी पॉलिटी की किताब पढ़ते हैं तो उसमें हमेशा यह मेंशन है कि जो आर्टिकल नंबर 19 के छह राइट्स हैं दोज आर ओनली प्रोटेस्टेड अगेंस्ट द स्टेट बट नॉट अगेंस्ट द प्राइवेट इंडिविजुअल्स ऑलमोस्ट एवरी पॉलिटी बुक एंड एवरी कॉन्स्टिट्यूशन बुक बेसिकली मेंशंस इट बट रिसेंटली सुप्रीम कोर्ट हैड सेड दैट द आर्टिकल नंबर 19 के जो राइट्स हैं दि आर दोज आर अवेलेबल अगेंस्ट द प्राइवेट इंडिविजुअल्स आल्सो व्हिच मींस कि अगर अभी कभी अगर हमें यूपीएससी के प्रीलिम्स में कभी पूछा जाता है तो वी नीड टू मेंशन कि आर्टिकल नंबर 19 जो है उसको प्राइवेट इंडिविजुअल्स के अगेंस्ट भी प्रोटेक्शन मिलती है सिटीजंस अ
2:20 के लिए ये राइट अवेलेबल है दज आर अवेलेबल टू द शेयर होल्डर्स ऑफ अ कंपनी पर फॉरेनर्स को लीगल पर्सन जो कंपनीज होती हैं कॉरपोरेशंस होते हैं उनके लिए ये अवेलेबल नहीं है मतलब जितने भी फंडामेंटल राइट्स हैं उसमें से आर्टिकल नंबर 15 16 n 19 एंड 29 और 30 दीज आर अवेलेबल ओनली टू द इंडियन सिटीजंस नॉट टू फॉरेनर्स बाकी जो राइट्स हैं इसके अलावा जैसे कि आर्टिकल नंबर 17 18 21 22 दोज आर अवेलेबल टू द फॉरेनर्स आल्सो हमारे पास जो ये 19 आर्टिकल के अंदर छह राइट्स हैं इनके ऊपर रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस लगाई जा सकती है मतलब कि फ्रीडम ऑफ स्पीच ऑफ एक्सप्रेशन है परंतु किसी को गाली देने का अधिकार नहीं है फ्रीडम ऑफ असेंबली है लेकिन आर्म्स हथियारों के साथ असेंबली होने का कोई अधिकार नहीं होता है दीज रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस एक बार हम इसको ओवरव्यू के
3:07 तौर पर देखते हैं जैसे कि हमारे पास आर्टिकल नंबर 19.1 ए के अंदर अधिकार है राइट ऑफ फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन का व्हिच इज आर्टिकल 19.1 ए 19.2 में उसके ऊपर जो रिस्ट्रिक्शंस है वो मेंशन है एंड देन देयर आर टोटल एट रिस्ट्रिक्शंस द फ्रीडम ऑफ स्पीच ऑफ एक्सप्रेशन कैन बेसिकली बी कर्टेल्ड अगर उस स्पीच से या उस एक्सप्रेशन से भारत की सोव निटी और इंटीग्रिटी पर खतरा हो या फिर सिक्योरिटी ऑफ द स्टेट पर खतरा हो फ्रेंडली रिलेशंस विद फॉरेन स्टेट्स पे प्रॉब्लम होगी तो फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन कटेल किया जा सकता है पब्लिक ऑर्डर अगर बिगड़ने का डर हो तो फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन कटेल हो सकता है डीसेंसी और मोरालिटी कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट डिफेमेशन एंड किसी ऑफेंस को इनसाइटमेंट करने की कोई स्पीच हो तो ये सब रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस हैं जो कि हमारे फ्रीडम ऑफ जो कि स्पीच और
3:53 एक्सप्रेशन पर लगाई जा सकती है सिमिलरली राइट टू असेंबल पीसफुली एंड विदाउट आर्म्स एक अधिकार है परंतु ऐसी असेंबली जिससे सॉवरेन और इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया पे खतरा हो या फिर पब्लिक ऑर्डर का खतरा हो उसके ऊपर रिस्ट्रिक्शंस लग सकती हैं यू कैन मेक एसोसिएशंस यूनियन एंड द कोऑपरेटिव सोसाइटीज बट देयर आर थ्री रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस रिलेटेड टू सॉवरेन पब्लिक ऑर्डर एंड द मोरालिटी यू कैन मूव फ्रीली थ्रू आउट द टेरिटरी ऑफ इंडिया परंतु अगर जनरल पब्लिक का इंटरेस्ट है तो व जो फ्रीली फ्री मूवमेंट है उसको रोका जा सकता है उसके ऊपर रिस्ट्रिक्शंस लगाई जा सकती है शेड्यूल ट्राइब्स के इंटरेस्ट को प्रोटेक्ट करने के लिए रिस्ट्रिक्शंस लग सकती हैं सिमिलरली एवरी इंडियन हैज अ राइट टू रिजाइंड एंड सेटल इन एनी पार्ट ऑफ़ द टेरिटरी ऑफ़ इंडिया विद टू रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस इट कैन बी स्टॉप्ड इन द इंटरेस्ट ऑफ़ द जनरल पब्लिक फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ़ द इंटरेस्ट ऑफ़ द
4:39 शेड्यूल्ड ट्राइब्स आल्सो सम एक्शंस कैन बी टेकन देन देयर वाज द राइट टू एक्वायर होल्ड एंड द डिस्पोज ऑफ़ द प्रॉपर्टी व्हिच हैज बीन डिलीटेड बाय दी 44th अमेंडमेंट राइट टू प्रैक्टिस एनी प्रोफेशन ऑक्यूपेशन और ट्रेड और बिजनेस लेकिन कुछ प्रोफेशन और कुछ ऑक्यूपेशंस पे जनरल पब्लिक इंटरेस्ट में रिस्ट्रिक्शंस लग सकती हैं गवर्नमेंट कैन एक्चुअली रिक्वायर टू हैव नेसेसरी प्रोफेशनल एंड द टेक्निकल क्वालीफिकेशंस कोई ट्रेड या बिजनेस इंडस्ट्री जो स्टेट सिटीजंस को एक्सक्लूड करके चलाती है उनको भी बेसिकली एक रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन की तरह रोका जा सकता है लेट्स ट्राई टू डू इट इन द डिटेल आर्टिकल नंबर 19 1 पॉइंट ए सेज दैट एवरी इंडियन एवरी इंडियन सिटीजन हैज अ फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन मतलब कि अपने व्यूज को ओपिनियन को बिलीव्स को कंविद के द्वारा राइटिंग प्रिंटिंग
5:26 पिक्चरिंग या किसी और दूसरे मैनर में हम एक्सप्रेस कर सकते हैं दिस एक्सप्रेशन दिस आर्टिकल 19 हैव आल्सो बीन गिवन अ वाइडर डोमेन बाय द सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सात दशक में यानी कि पिछले 70 सालों में कांस्टिट्यूशन बनने के बाद अपनी डिफरेंट डिफरेंट जजमेंट से इसका डोमेन बढ़ा दिया है मतलब कि फ्रीडम ऑफ स्पीच ऑफ एक्सप्रेशन के अंदर फ्रीडम ऑफ प्रेस भी आता है फ्रीडम ऑफ कमर्शियल एडवर्टाइजमेंट भी आता है टेलीफोन कन्वर्सेशन है उनको टैप नहीं किया जा सकता है वी हैव राइट टू टेलीकास्ट गवर्नमेंट हैज नो मोनोपोली ऑन द इलेक्ट्रॉनिक मीडिया राइट टू नो अबाउट गवर्नमेंट गवर्नमेंटल एक्टिविटीज मतलब कि हमें गवर्नमेंट की एक्टिविटीज के बारे में पता चले हम उसके बारे में इंफॉर्मेशन सीख कर सकते हैं एंड दैट बिकम अ पार्ट ऑफ राइट टू स्पीच एंड एक्सप्रेशन सिमिलरली बोलने और एक्सप्रेस करने के अधिकार के साथ-साथ
6:11 फ्रीडम ऑफ साइलेंस भी है सो ऑल ऑफ दीज राइट्स हैव बीन इंक्लूडेड इनसाइड द फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन ऑन द बेसिस ऑफ द डिफरेंट डिफरेंट सुप्रीम कोर्ट जजमेंट्स द स्टेट रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस लगा सकती है वो रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस जो हैं वो आठ रिस्ट्रिक्शंस हैं सॉवरेन और इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया के ऊपर सिक्योरिटी ऑफ द स्टेट डीसेंसी मोरालिटी कंटेम ऑफ कोर्ट डिफॉर्मेशन या इनसाइटमेंट टू एन ऑफेंस से रिलेटेड नाउ व्हेन इट कम्स टू प्रीलिम्स यूपीएससी कैन सम टाइम्स गेट गो सो डीप टू आस्क की कौन सी रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन किस वाली फ्रीडम के ऊपर चलती है तो थोड़ा सा बेहतर होगा अगर हम इनको थोड़ा सा स्टडी कर ले बिल्कुल फुल फ्लेजर एकदम याद करने की या रट्टा लगाने की जरूरत नहीं है बट वी शैल डेफिनेटली हैव दिस मच कैपेबिलिटी कि हम ये अगर आठ रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस पूछी
6:56 जाए तो हम इनको प्रीलिम्स के ऑप्शंस में से आइडेंट फाई कर सके सेकंड इज आर्टिकल 19.1 एंड बी यानी कि क्लॉज वन का बी सेक्शन फ्रीडम ऑफ असेंबली हर एक नागरिक का अधिकार है कि वो पीसफुली असेंबल कर सकते हैं विदाउट आर्म्स इसमें आप पब्लिक मीटिंग्स डेमोंस्ट्रेट प्रोसेशंस ले सकते हैं ये जो फ्रीडम है ये सिर्फ और सिर्फ पब्लिक लैंड के ऊपर एक्सेसिबल हो सकती है एक्सरसाइज की जा सकती है दैट डजन मीन कि हमें कहीं पे प्राइवेट किसी दूसरे के प्राइवेट घर पे या किसी की प्राइवेट प्रॉपर्टी पे असेंबल होने का अधिकार है ओनली दोस थिंग्स जो कि पब्लिकली एक्सेसिबल है है वहां पर पब्लिकली अस असेंबल किया जा सकता है मोर इंपोर्टेंट दे शुड बी पीसफुल एंड दी अन आर्म्ड अगर वायलेंट रायट राइट अस असेंबली होगी जिससे बेसिकली पब्लिक पीस की ब्रीच होती है या जिसके अंदर हथियार यूज़ होते हैं दैट वुड नॉट बी कंसीडर्ड
7:44 अंडर दिस अ फ्रीडम ऑफ दी असेंबली उसके अगेंस्ट पुलिस एक्शंस ले सकती है राइट डजन इंक्लूड द राइट टू स्ट्राइक अ द स्टेट कैन इंपोज रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन दो ग्राउंड्स पे इस पे भी रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस लगाई जा सकती है सॉवरेन एंड इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया एंड पब्लिक ऑर्डर इन उस पब्लिक ऑर्डर के अंदर एक पर्टिकुलर सुप्रीम कोर्ट केस में यह भी कहा गया है कि अगर ट्रैफिक को मेंटेन करने के लिए कोई रीजनेबल रिस्ट्रिक्शन लगाई गई है तो वो बेसिकली वैलिड होते हैं फ्रीडम ऑफ असेंबली से रिलेटेड एक सेक्शन है सेक्शन 144 इन दी क्रिमिनल प्रोसीजर कोड ऑफ 1973 जरूरत पड़ने पर जब कभी लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन होती है तो मजिस्ट्रेट बेसिकली असेंबलीज को रिस्ट्रेन भी कर सकता है अगर ऐसा समस्या है कि ह्यूमन लाइफ को या ह्यूमन हेल्थ को या किसी सेफ्टी को या फिर
8:31 पब्लिक पीस की डिस्टरबेंस होने की या रायट होने की संभावना होती है सेक्शन 141 ऑफ इंडियन पीनल कोड बेसिकली एक्सप्लेंस दिस कि अगर कहीं पर किसी जगह पर गवर्नमेंट के द्वारा कर्फ्यू लगाया जाए तो वहां पे पांच या पांच से अधिक लोगों की जो असेंबली है वो अनलॉफुल हो जाएगी अगर वैसी असेंबली से बेसिकली कोई लॉ और लीगल प्रोसेस को रेसिस्ट करने की कोशिश की जाए प्रॉपर्टी किसी दूसरे इंडिविजुअल की प्रॉपर्टी को ऑक्यूपाइड ट्रेस पस हो या यह पांच से अधिक लोग कोई इल्लीगल एक्ट करने की कोशिश कर रहे हो या वोह गवर्नमेंट या उसके ऑफिशल्स को थ्रेटें करने की कोशिश कर रहे हो मतलब कि कांस्टिट्यूशन के अंदर फ्रीडम ऑफ असेंबली है उसमें दो प्रकार की रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस भी हैं उसके अलावा दूसरे जो क्रिमिनल प्रोसीजर कोड हैं और इंडियन पीनल कोड है उसके अंदर भी वह फंडामेंटल राइट की पर्टिकुलर रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस एजिस्ट
9:18 करती है आर्टिकल नंबर 191 सी गिव्स यू दी फ्रीडम ऑफ दी एसोसिएशन हर एक नागरिक का अधिकार है कि हम एसोसिएशंस बना सकते हैं पॉलिटिकल पार्टीज बना सकते हैं पार्टनरशिप फर्म सोसाइटीज क्लब्स ऑर्गेनाइजेशंस बना सकते हैं और सिर्फ और सिर्फ यही अधिकार नहीं है कि वो हम एसोसिएशंस बना सके इट आल्सो कवर्स द नेगेटिव राइट मतलब कि पीपल आल्सो हैव अ चॉइस नॉट टू जॉइन एनी एसोसिएशन और नॉट टू जॉइन एनी यूनियन एज यूजुअल सारे के सारे फंडामेंटल राइट्स के ऊपर रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस होने के साथ यहां पर भी रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस है सॉवरेन और इंटीग्रिटी के बेसिस पे पब्लिक ऑर्डर और मोरालिटी देर आर थ्री रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस दैट कैन एक्चुअली बी पुट ऑन द फ्रीडम ऑफ द एसोसिएशन आल्सो राइट टू ऑब्टेन रिकॉग्नाइज ऑफ द एसोसिएशन इज बेसिकली नॉट अ फंडामेंटल राइट कुछ
10:04 एसोसिएशंस होती हैं जो कि अनऑफिशियल एसोसिएशंस होती है एंड देन देयर आर सर्टेन काइंड ऑफ एसोसिएशंस एंड द सोसाइटीज और द ऑर्गेनाइजेशंस जिसको गवर्नमेंट सर्टेन पैरामीटर्स में रिकॉग्निशन भी देती है जैसे कि कुछ पॉलिटिकल पार्टी होती है जिनको कहा जाता है रिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज बाय द इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया एंड देन देयर आर सेवरल अनरिकॉग्नाइज्ड पॉलिटिकल पार्टीज आल्सो द सुप्रीम कोर्ट सेज दैट कि एसोसिएशन बनाना पॉलिटिकल पार्टीज बनाना क्लब्स बनाना ट्रेड यूनियंस या कोई और किसी प्रकार का ग्रुप बनाना यह एक फंडामेंटल राइट है पर गवर्नमेंट उसको रिकॉग्नाइज करे या ना करे वोह एक फंडामेंटल राइट नहीं है फॉर दैट यू विल हैव टू फॉलो द पर्टिकुलर पैरामीटर्स या लॉज एंड रेगुलेशंस एज सेट अप फॉर दैट रिकॉग्निशन सुप्रीम कोर्ट हेल्ड दैट ट्रेड यूनियंस हैव नो गारंटीड राइट टू इफेक्टिव बारगेनिंग और राइट टू स्ट्राइक और राइट टू
10:50 डिक्लेयर अ लॉकआउट राइट टू स्ट्राइक को बेसिकली एक अप्रोपो किया जा सकता है फ्रीडम ऑफ मूवमेंट आर्टिकल नंबर ना 191 डी के अंदर दिया गया है द फ्रीडम एंटाइटल एवरी सिटीजंस टू मूव फ्रीली थ्रू आउट द टेरिटरी ऑफ इंडिया मतलब कि किसी एक स्टेट से विद इन द स्टेट फ्रॉम वन स्टेट टू अनदर बेसिकली बिकॉज इंडिया इज कंप्लीट वन यूनिट एक सिंगल यूनिट है वो स्टेट्स के अंदर डिवाइड किया गया है बट वो सिर्फ और सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव कन्वीनियंस के लिए किया गया है सो द पर्पस ऑफ दिस राइट इज टू प्रमोट नेशनल फीलिंग एंड नॉट द पैरो किजमुरी जन के लिए एक्सेसिव प्यार होना द ग्राउंड ऑफ इंपोजिंग रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस क्या हो सकती हैं एक तो अगर जनरल पब्लिक का इंटरेस्ट है इन द इंटरेस्ट ऑफ द जनरल पब्लिक फ्रीडम ऑफ मूवमेंट को भी
11:35 रिस्ट्रिक्टर है एंड द प्रोटेक्शन ऑफ द इंटरेस्ट ऑफ द शेड्यूल्ड ट्राइब्स आल्सो फ्रीडम ऑफ मूवमेंट को रिस्ट्रिक्टर है मतलब कि दोज एरियाज जहां पर ट्राइबल एरिया अ ट्राइबल डोमिनेशन है या फिर ट्राइबल मेजॉरिटी में है वहां पर कभी-कभी आउटसाइडर्स की जो एंट्री है उसको रिस्ट्रिक्टर देते हैं ताकि वो जो डिस्टिंक्टिव कल्चर या डिस्टिंक्टिव लैंग्वेज कस्टम्स होते हैं मैनर्स होते हैं शेड्यूल ट्राइब के उनको सेफगार्ड किया जा सके उनको एक्सप्लोइटेशन से बचाया जा सके सुप्रीम कोर्ट हैव इन पर्टिकुलर केस आल्सो सेड दैट द फ्रीडम ऑफ़ मूवमेंट ऑफ़ द प्रॉस्टिट्यूट्स कैन आल्सो बी रिस्ट्रिक्टेड ऑन द ग्राउंड ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड इन द इंटरेस्ट ऑफ द पब्लिक मोरल अ मोरल्स बम्बे हाई कोर्ट की एक और जजमेंट कहती है कि जिन इंडिविजुअल्स को एड्स के द्वारा मतलब जो एडस से अफेक्टेड हैं जिनको एड्स हो गया है उनकी मूवमेंट को भी रिस्ट्रिक्टर है इन द इंटरेस्ट ऑफ द
12:21 पब्लिक हेल्थ फ्रीडम ऑफ मूवमेंट अगर हम देखें तो बेसिकली दो डायमेंशन हैं उसकी सबसे पहली है राइट टू मूव आउट इन साइड द कंट्री मतलब अपने देश के अंदर बेसिकली हम कहीं पर भी एंट्री कर सकते हैं कहीं पर भी जा सकते हैं एंड द राइट टू मूव आउटसाइड द कंट्री आल्सो नाउ व्हेन एवर वी स्टडी दिस आर्टिकल दिस थिंग नीड्स टू बी अनोले जड कि ये दो अलग-अलग राइट्स हैं आर्टिकल नंबर 19 के अंदर जो राइट है दैट इज द फ्रीडम ऑफ मूवमेंट इनसाइड द कंट्री मतलब कि देश के अंदर घूमने की देश के अंदर मूव करने की बेसिकली आजादी है वेयर एज जो फ्रीडम टू मूव आउटसाइड है दैट इज कवर्ड इन दी आर्टिकल नंबर 21 अ अंडर दी राइट टू लाइफ राइट टू लाइफ के अंदर वो अधिकार होता है सो आर्टिकल 19 प्रोटेक्ट्स ओनली दी फर्स्ट डायमेंशन राइट टू मूव इनसाइड द कंट्री
13:06 वेयर एज द सेकंड डायमेंशन व्हिच इज राइट टू मूव आउटसाइड द कंट्री वो आर्टिकल नंबर 21 राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी कवर करता है फ्रीडम ऑफ रेजिडेंस हर एक नागरिक का अधिकार है कि हम देश में कहीं पर भी रिजाइंड कर सकते हैं और कहीं पर भी सेटल कर सकते हैं मतलब कि दो अध इसमें बेसिकली दो पार्ट्स है राइट टू रिजाइंड मतलब कि कहीं पर टेंपरेरिली हम रहते हैं जैसे कि अगर हम कहीं पर दिल्ली में पैदा हुए दिल्ली में रहते हैं लेकिन हम कहीं पर बेंगलोर या बॉम्बे में पढ़ने के लिए चले जाएं तो हम वहां पर कहेंगे कि हम कुछ दिनों के लिए या फिर जॉब के लिए चले जाएं तो वहां पर रेजिडेंस करते हैं एंड द राइट टू सेटल बेसिकली सेज जहां पर हम अपना परमानेंट रिलेटिवली परमानेंट होम बना लेते हैं जहां पर हम रहना चाहते हैं जो हमारा ऑफिशियल एड्रेस होता है ये राइट बेसिकली इंटेंडेड इसका मेन पर्पस था ताकि इंटरनल बैरियर्स जो हैं वो देश के अंदर वो सारे
13:52 के सारे रिमूव हो जाए नेशनलिज्म और नैरो माइंडेडनेस नरो माइंडेडनेस को अवॉइड करने के लिए नेशनलिज्म को प्रमोट करने के लिए ि है यहां पर रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस दो ग्राउंड्स पर लगाई जा सकती हैं अगेन इन द इंटरेस्ट ऑफ द जनरल पब्लिक इंडिविजुअल का रेजिडेंस और जो सेटलमेंट है उसके ऊपर कुछ रोक लगाई जा सकती है फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द इंटरेस्ट ऑफ द शेड्यूल ट्राइब्स द रेजिडेंस एंड द सेटलमेंट एक्चुअली कैन बी रिस्ट्रिक्टेड यही राइट्स बेसिकली जो कि राइट टू मूवमेंट में है उसमें कभी-कभी आउटसाइडर्स को फुल अधिकार नहीं होते हैं कि वह ट्राइबल एरियाज में रिजाइंड कर सक और सेटल कर सके बट द मेन पर्पस इज बेसिकली टू प्रोटेक्ट द डिस्टिंक्टिव कल्चर और द लैंग्वेज और द कस्टम्स ऑफ़ द शेड्यूल ट्र इन मेनी पार्ट्स ऑफ द कंट्री ट्राइब्स हैव बीन परमिटेड टू रेगुलेट देयर प्रॉपर्टी इन अकॉर्डेंस विद द कस्टमरी रूल्स एंड द लॉज सुप्रीम कोर्ट सेड दैट इवन इन सर्टेन
14:38 एरियाज पर्सन लाइक प्रॉस्टिट्यूट्स हो या कोई हैबिट्युअली रोका जा सकता है उनको पर्टिकुलर कहीं पर सेटल या रिजाइंड करने से रिस्ट्रिक्टर है सो राइट टू रेजिडेंस एंड द राइट टू मूवमेंट आर बेसिकली ओवरलैपिंग टू सर्टेन एक्सटेंट एंड दोनों के दोनों कॉम्प्लीयंट शंस है पब्लिक इंटरेस्ट और प्रोटेक्शन ऑफ द इंटरेस्ट ऑफ द शेड्यूल ट्राइब्स की द आर्टिकल नंबर 191 जीी इज फ्रीडम ऑफ द प्रोफेशन सारे के सारे जो नागरिक हैं उनके पास अधिकार है कि दे हैव द राइट टू प्रैक्टिस एनी प्रोफेशन एनी ऑक्यूपेशन ट्रेड और बिजनेस इट इज वेरी वाइड इन द सेंस दैट इट कवर्स कि एवरीबॉडी
15:26 फॉर प्रैक्टिसिंग पर्टिकुलर प्रोफेशन अगर कोई डॉक्टर का काम करना चाहता है तो उसके लिए एक अ टेक्निकल क्वालिफिकेशन या प्रोफेशनल कोर्स करने की जरूरत होती है अगर कोई इंजीनियर बनना चाहता है तो पर्टिकुलर टेक्निकल क्वालीफिकेशंस बताई जा सकती है इसके साथ-साथ गवर्नमेंट चाहे तो किसी ट्रेड बिजनेस या इंडस्ट्री से सिटीजंस को एक्सक्लूड भी कर सकता है मतलब कि गवर्नमेंट हैज अ पर्टिकुलर राइट टू इंश्योर कि व किसी पर्टिकुलर इंडस्ट्री के अंदर मोनोपोली रख सकती है जैसे कि अगर सपोज कीजिए कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बसेस चलाने का काम है तो स्टेट कैन इंश्योर कि वो सिर्फ और बसेस जो है वो सिर्फ स्टेट के द्वारा चलाई जाए कोई पर्टिकुलर इंडस्ट्री है जो कि पब्लिक इंटरेस्ट में है उसको गवर्नमेंट फुली कंट्रोल कर सकती है एंड अदर पीपल और इ प्राइवेट सिटीजंस वुड नॉट बी अलाउड टू वर्क काम नो ऑब्जेक्शन कैन बी मेड व्हेन द
16:12 स्टेट कैरीज ऑन अ ट्रेड बिजनेस इंडस्ट्री एज अ मोनोपोली चाहे वो कंप्लीट हो या पार्शल हो टू द एक्सक्लूजन ऑफ द सिटीजंस स्टेट इज रिक्वायर्ड टू जस्टिफाई स्टेट इज इवन नॉट रिक्वायर्ड टू बेसिकली जस्टिफाई इट्स मोनोपोली राइट के अंदर यह अधिकार नहीं है कि आप ऐसे इ मोरल या फिर डेंजरस प्रोफेशन कर सके तो ट्रैफिकिंग इन वमन और चिल्ड्रन इज नॉट अ काइंड ऑफ एन ऑक्यूपेशन और ट्रेड जो कि जस्टिफाई होता है इस फ्रीडम के अंदर आप ड्रग्स का एक्सप्लोसिव का व्यापार नहीं कर सकते हैं स्टेट हैव अ लेजिटिमेसी एंड मोरल ऑब्लिगेशन टू एक्चुअली रिस्ट्रिक्टर सो दैट वो इस प्रकार के काम ना करें ऐसे चीजें कंप्लीट प्रोहिबिटेड की जा सकती है अगर जरूरत पड़े तो उनको रेगुलेट भी किया जा सकता है लाइसेंसिंग के द्वारा मतलब कि सबको फ्रीडम नहीं दी जाए इन अनुराधा इन केस इन 2020
17:00 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो फ्रीडम टू प्रैक्टिस एनी प्रोफेशन ट्रेड बिजनेस ऑक्यूपेशन ओवर द मीडियम ऑफ द इंटरनेट आल्सो एंजॉय द कॉन्स्टिट्यूशन प्रोटेक्शन अंडर आर्टिकल नंबर 191 जीी यहां पर अगर आप ध्यान से सोचे तो ये एक जुडिशरी की इनोवेशन है एंड दिस इज बेसिकली आल्सो अ साइन दैट आवर कॉन्स्टिट्यूशन इज अ लिविंग डॉक्यूमेंट हमारा कॉन्स्टिट्यूशन जब बना था या फिर आर्टिकल नंबर 19.1 जी यानी कि फ्रीडम ऑफ प्रोफेशन जब कांस्टिट्यूशन में 19 50 में ऐड की थी तब इंटरनेट एजिस्ट भी नहीं करता था हाउ एवर इन द प्रेजेंट डे द सेम राइट हैज एक्चुअली बीन इंटरप्रिटेड टू आल्सो इंक्लूड द मीडियम ऑफ द इंटरनेट रिस्ट्रिक्शंस जो हैं इंटरनेट के ऊपर भी बिजनेस करने पर वही उसी प्रकार की रिस्ट्रिक्शंस लगाई जा सकती हैं जो कि आर्टिकल 19.1 जी के ऊपर लग सकती हैं
17:47 प्रोफेशन के अंदर प्रोफेशन के डेंजरस प्रोफेशन को रिस्ट्रिक्टर वाली इट आल्सो हैव टू हैव द टेस्ट ऑफ द प्रोपोर्शनल फर्द एन ऑर्डर सस्पेंडिंग इंटरनेट सर्विसेस इंडेफिनटली इज इंप बल अंडर दी टेंपररी सस्पेंशन ऑफ द टेलीकॉम सर्विसेस ऑफ द 2017 गवर्नमेंट के पास राइट्स हैं गवर्नमेंट ने एक रूल बनाया हुआ है टेंपरेरी सस्पेंशन ऑफ़ द टेलीकॉम सर्विसेस टू मेंटेन लॉ एंड ऑर्डर और इन द पब्लिक ऑफ इंटरेस्ट इन सर्टेन प्लेसेस सम टाइम्स इंटरनेट सर्विसेस कैन बी सस्पेंडेड लेकिन इंटरनेट सर्विसेस को सस्पेंड करने का जो ऑर्डर है वह हमेशा टाइम लिमिटेड होना चाहिए उसको इंडेफिनटली सस्पेंड नहीं किया जा सकता जस्ट टू हैव वन क्विक रिवीजन आर्टिकल नंबर 191 ए इज फ्रीडम ऑफ द स्पीच एंड एक्सप्रेशन जिस के अंदर फ्रीडम ऑफ प्रेस फ्रीडम ऑफ एडवर्टाइजमेंट फ्रीडम ऑफ साइलेंस भी आता है एंड इट बेसिकली हैज दी
18:34 एट रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस आर्टिकल नंबर 191 बी पीसफुल असेंबली अन आर्म्ड पब्लिक मीटिंग्स प्रोसेशंस के बारे में है इस पर दो रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस हैं सवरे निटी एंड इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया एंड रिलेटेड टू द पब्लिक ऑर्डर आर्टिकल नंबर 19 1 प स फ्रीडम ऑफ एसोसिएशन की बात करता है कि भारत के नागरिक यूनियन सोसाइटीज कोऑपरेटिव्स कमर्शियल पॉलिटिकल रिलीजियस या इकोनॉमिकल किसी भी प्रकार के ऑर्गेनाइज बना सकते हैं कुछ रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस उनके ऊपर लग सकते हैं सोव निटी और इंटीग्रिटी ऑफ इंडिया पब्लिक ऑर्डर और मोरालिटी से एसोसिएटेड 19.1 डी कहता है कि फ्रीडम ऑफ मूवमेंट सबके पास अवेलेबल है टू रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस ऑन द इंटरेस्ट ऑफ द जनरल पब्लिक एंड द प्रोटेक्शन ऑफ द इंटरेस्ट ऑफ द शेड्यूल्ड ट्राइब्स यहां पर भी लगाई जा सकती है बट व्हेन एवर वी डू द फ्रीडम ऑफ मूवमेंट ऑलवेज दिस पॉइंट नीड्स
19:20 टू बी अनोले कि आर्टिकल 191 डी प्रोटेक्ट्स ओनली इंटरनल मूवमेंट ये अच्छा एक प्रीलिम्स का क्वेश्चन है जो कि डेफिनेटली एमसीक्यू में पूछा जा सकता है कि आर्टिकल 19 के अंदर सिर्फ और सिर्फ इंटरनल मूवमेंट के बारे में प्रोटेक्शन की बात की गई है वेयर एज आर्टिकल 21 एक्सप्लीसिटली डजन मेंशन इट लेकिन मेनका गांधी केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक्सटर्नल मूवमेंट यानी कि राइट टू मूव एंड कम बैक टू दी कंट्री आर्टिकल 21 के अंदर इंक्लूड कर दिया है आर्टिकल 19 1e फ्रीडम ऑफ रेजिडेंस की बात करता है कि हम कहीं पर भी सेटल और रिजाइंड कर सकते हैं रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस जो हैं वो सिमिलर हैं जो कि फ्रीडम ऑफ मूवमेंट के ऊपर है एंड द आर्टिकल 191 जी फ्रीडम ऑफ प्रोफेशन वी हैव कंप्लीट फ्रीडम कि हम किस प्रकार के काम को करना चाहे लेकिन जनरल पब्लिक के
20:05 इंटरेस्ट में या प्रोफेशनल और टेक्निकल क्वालीफिकेशंस स्टेट के द्वारा कंप्लीट मोनोपोली कुछ ऐसी रीजनेबल रिस्ट्रिक्शंस हैं इसमें अगर आपने नोटिस किया होगा तो आर्टिकल 191 f इंक्लूडेड नहीं है दैट इज द सेवंथ फ फंडामेंटल राइट व्हिच यूज टू बी इन द कॉन्स्टिट्यूशन लेकिन 44th कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट के बाद 1978 में उसको डिलीट कर दिया गया है राइट टू प्रॉपर्टी का जो अधिकार था वो आर्टिकल 31 एंड आर्टिकल 191 f के अंदर दिया हुआ था यह 44th अमेंडमेंट से दोनों जगह से डिलीट कर दिया गया है एंड नाउ इट हैज बीन एडेड इन आर्टिकल नंबर 300a व्हिच मींस कि राइट टू प्रॉपर्टी अर्लिया वाज अ फंडामेंटल राइट नाउ इट इज अ